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चीन को भड़काना नहीं चाहता भारत, इसलिए उठाया ये कदम

Wed, 13 May 2015 10:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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अक्टूबर में भारत और अमेरिका के बीच होने वाले नौसेना युद्ध अभ्यास से जापान को बाहर रखा गया है। इस फैसले को लेकर माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की अपनी यात्रा से पहले चीन को भड़काना नहीं चाहता। ल्लेखनीय है कि मोदी की चीन यात्रा गुरुवार से शुरु हो रही है।
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सूत्रों के अनुसार मालाबार में होने वाले सैन्य अभ्यास में अमेरिका और भारत ही हिस्सा लेंगे, लेकिन मोदी और ओबामा के दोनों मिलने के मौके पर यह तय किया गया था कि लड़ाई युद्धाभ्यास को उन्नत किया जाएगा।

भारत और अमेरिका के इस युद्धाभ्यास के लिए योजना बैठक जुलाई में होगी। अभी तक जापान के इसमें शामिल होने की कोई संभावना नहीं है।

मोदी कर सकते हैं जापान को निमंत्रित

जापान और भारत का पहला संयुक्त युद्धाभ्यास 2012 में हुआ था। जापान के साथ युद्धाभ्यास के लिए योजना नवंबर में इससे अलग तैयार की जा रही है।

वहीं वाशिंगटन और टोक्यो दोनों इच्छुक हैं कि जापान इस युद्धाभ्यास में शामिल हो, लेकिन भारत चीन को यह एहसास नहीं दिलाना चाहता कि वह किसी प्रकार के नौसैनिक समूहीकरण का पक्षधर है।

सूत्रों के मुताबिक मोदी इस युद्धाभ्यास में जापान को निमंत्रण दे सकते हैं। इस युद्धाभ्यास में अमेरिका अपनी कई उन्नत सबमरीन और मिसाइलों के साथ अपना प्रदर्शन करेगा।

यूपीए सरकार की नीति जारी है?

इस मामले में देखें तो केन्द्र की राजग सरकार पूर्व की यूपीए सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है। पूर्व में यूपीए सरकार ने भी जापान को कई युद्धाभ्यास से बाहर रखा था।

सूत्रों के अनुसार भारत किसी भी तरह की ऐसी गुटबाजी से बचना चाहता है जो उसके और चीन के रिश्ते में दरार डाल सके। 2007 में चीन के विरोध के बाद से जापान को किसी युद्धाभ्यास में शामिल नहीं किया गया।

2007 के युद्धाभ्यास में अमेरिका के साथ, जापान, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर की नौसेनाओं ने भी हिस्सा लिया था, जिसका चीन ने विरोध किया था।
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तटस्थ रहना चाहता है भारत

जापान को 2009 और 2014 में हुए युद्धाभ्यासों में शामिल किया गया था, जो उत्तरी पश्चिम प्रशांत महासागर में आयोजित की गई थी। भारत के साथ-साथ जापान, और अमेरिका भी चीन की बढ़ती सैनिक ताकत से सावधान रहना चाहते हैं।

प्रशांत महासागर में बढ़ती चीन की मौजूदगी तीनों के लिए चिंता का सबब है। अमेरिका और जापान के रिश्तों के बारे में चीनी आशंकाएं खुली हैं, लेकिन भारत इन सब के बीच खुद को तटस्थ दिखाना चाहता है।
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