लद्दाख में चीनी घुसपैठ के बाद पैदा हुए विवाद से मिले 'सबक' का जायजा लेते हुए भारत और चीन ने सोमवार को यहां सरहद पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने के लिए और उपाय करने का फैसला किया। इस बीच दोनों पक्षों के बीच आठ समझौते भी हुए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके चीनी समकक्ष ली कचियांग के बीच 'आपसी हितों और चिंताओं' पर विचार-विमर्श के बाद इसका एलान किया गया।
यह रविवार के बाद शीर्ष नेताओं की दूसरी मुलाकात थी, जिसमें सीमा विवाद, साझा नदियों और द्विपक्षीय व्यापार समेत कई ऐसे मुद्दों पर बातचीत हुई।
संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दोनों नेताओं ने कहा रविवार रात और सोमवार सवेरे दोनों पक्षों के बीच खुले दिल से स्पष्ट बातचीत हुई।
चीनी घुसपैठ पर मनमोहन सिंह ने कहा, 'हमने पश्चिमी सेक्टर में हुई हालिया घटना से मिले सबक पर भी चर्चा की है।'
चीन के साथ शांति बनाए रखने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'हमने अपने विशेष प्रतिनिधियों को आगे उन उपायों पर विचार करने को कहा है, जिनसे सीमा पर शांति और सौहार्द्र कायम करने में मदद मिलेगी।'
उन्होंने कहा, 'हमारे बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि विशेष प्रतिनिधि वार्ता जारी रखने के लिए जल्द ही मुलाकात करेंगे, ताकि सीमा विवाद का ऐसा समाधान खोजा जा सके, जो दोनों पक्षों के लिए व्यावहारिक, स्पष्ट और स्वीकार्य हो।'
यह उच्चस्तरीय वार्ता लद्दाख की डेपसांग घाटी में चीनी सुरक्षाकर्मियों के भारतीय सरहद में 19 किलोमीटर तक घुस आने के करीब एक महीने बाद हुई है।
दोनों मुल्कों के बीच कुछ दिक्कतें होने की बात स्वीकार करते हुए चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग ने कहा, 'हमारा मानना है कि ऐतिहासिक रूप से मिले सरहद के सवालों पर दोनों पक्षों ने बीते कुछ वक्त से कुछ सिद्धांत बना लिए हैं। इस बीच हमने सीमा पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की कोशिश की है।'
चीनी पीएम का विरोध
इस बीच चीनी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का विरोध कर रहे तीन तिब्बती प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। ये ताज पैलेस होटल के करीब प्रदर्शन कर रहे थे, जहां ली कचियांग ठहरे हैं।
इनमें से एक प्रदर्शनकारी ने होटल के करीब पेट्रोल पंप की इमारत पर चढ़कर एक बैनर लहराया, जिस पर लिखा था, 'चीन तिब्बत से बाहर जाओ, चीन भारत से बाहर जाओ। तिब्बत जरूर आजाद होगा।'
इन प्रदर्शनकारियों को तुरंत गिरफ्तार कर थाने ले जाया गया।