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चीन ने दी धमकी, सड़क न बनाने को कहा

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अरुणाचल प्रदेश में मैक मोहन लाइन के पास रोड नेटवर्क विकसित करने की भारत की योजना पर चीन ने ऐतराज जताया है। ड्रैगन ने कहा कि भारत ऐसे कदम न उठाए जिससे सीमा पर तनाव बढ़े।
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चीन ने इस बात की उम्मीद जताई कि सीमा विवाद को खत्म करने के लिए आखिरी समझौता होने से पहले भारत ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगा जिससे हालात जटिल हों।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हांग ली ने बुधवार को कहा, ‘फिलहाल हमें इस बाबत और जानकारी का इंतजार है। भारत और चीन के बीच ब्रिटिश शासन काल से ही सीमा को लेकर विवाद है। इस मसले को सही तरीके से निपटाने की जरूरत है।’

ली केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में चीन की बराबरी करने के लिए अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजय नगर से तवांग के मैगो-थिंगबू तक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास व्यापक सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना का खुलासा किया था।
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अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत बताता है चीन

ली ने कहा, ‘पूर्वी हिस्से में चीन और भारत के बीच सीमा को लेकर विवाद है। हमें उम्मीद है कि इस मामले में बिना आखिरी समझौते पर पहुंचे भारत ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगा जिससे भविष्य में हालात जटिल हों।’

दरअसल भारत की चिंता चीन की ओर से तिब्बत में व्यापक सड़क और रेल नेटवर्क के विकास को लेकर है। इससे वह इस हिमालयी क्षेत्र में सैनिक और अन्य सैन्य साजोसामान की आपूर्ति बड़ी तेजी से कर सकता है।

भारी सड़क नेटवर्क के अलावा चीन सिक्किम सीमा तक रेल नेटवर्क बनाने के करीब है। यहीं नहीं उसने अरुणाचल सीमा के पास न्यिगची तक नया रेल नेटवर्क विकसित करने की भी घोषणा की है।

चीन तिब्बत में पांच हवाईअड्डे बना चुका है। चीन का कहना है कि यह कदम तिब्बत के दूर दराज के इलाकों में विकास के लिए है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताता रहा है, जिसके चलते ही दोनों देशों के बीच मैक मोहन लाइन पर विवाद है।
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17 दौर की बातचीत से भी नहीं निकला नतीजा

भारत का कहना है कि जब चीन औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों की ओर से म्यांमार और अन्य देशों के साथ तय की गई सीमा को मान्यता देता है तो भारत के साथ उसे आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

चीन सीमा विवाद को महद 2000 किलोमीटर तक सीमित मानाता है और इसे अरुणाचल तक ही सीमित बताता है, जबकि भारत के मुताबिक यह 4000 किलोमीटर है और इसमें पश्चिमी सीमा भी शामिल है। सीमा विवाद को हल करने के लिए दोनों देश अब तक 17 दौर की बातचीत कर चुके हैं।

सीमा क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में चीन की बराबरी करने के लिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजय नगर से तवांग के मैगो-थिंगबू तक अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास व्यापक सड़क नेटवर्क विकसित करने की योजना बनाई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को इस योजना का खुलासा किया था।
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