भारत और बांग्लादेश के बीच हुए ऐतिहासिक जमीन अदला-बदली समझौते से भले ही हजारों लोगों को आजादी मिल गई हो लेकिन सभी इससे खुश नहीं हैं।
इस समझौते ने सीमा के दोनों ओर रहने वाले कई लोगों की जमीन निगलकर उन्हें कंगाली के कगार पर ला खड़ा किया है। लोगों का आरोप है कि दोनों सरकारों ने अवैध तरीके से उनकी जमीन एक-दूसरे को सौंप दी है। बांग्लादेश के रंगपुर जिले में रहने वाले अरशद हुसैन दवा की दुकान चलाते हैं। उनका आरोप है कि भारत स्थित बांग्लादेशी भूखंड दक्षिण मशालडांगा में उनके परिवार की 100 बीघा से ज्यादा जमीन थी।
हुसैन के दादा अलाउद्दीन सरकार ने भारत की आजादी से पहले ही वह जमीन खरीदी थी और उसी समय से उसका मालिकाना हक हुसैन के परिवार के पास था, लेकिन समझौते के लागू होते ही वह जमीन उनके हाथों से निकल गई है। अब वह भारत सरकार की संपत्ति है।