प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विज्ञान के क्षेत्र में अभी तक हासिल उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भारत का लक्ष्य अब 2020 तक दुनिया की शीर्ष 5 वैज्ञानिक शक्तियों में आने का है। इस मौके पर उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अन्वेषण नीति 2013 का भी विमोचन किया। मनमोहन ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस के शताब्दी अधिवेशन में यह बात कही। अधिवेशन पांच दिनों तक चलेगा।
मनमोहन ने वंचित और पिछडे़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने तथा अमीर-गरीब के बीच की खाई को पाटने के लिए विज्ञान का सहारा लेने का आह्वान किया। उन्होंने इसके लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति सहित जननीतियों में कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत बताई। उन्होंने कृषि के अलावा ऊर्जा, सुरक्षा, स्वच्छता, साफ पेयजल तथा सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के 65 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, ऐसे में विज्ञान का इस्तेमाल कर कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। पीएम ने यूरोपियन सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (सीईआरएन) में हिग्स बोसोन कण की खोज जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधानों में भारत के प्रतिनिधित्व का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे बढ़ावा देने की बात भी की।
अधिवेशन का उद्घाटन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया। इस दौरान विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री एस जयपाल रेड्डी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एम के नारायणन और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थे।
पीएम के साथ ममता ने साझा किया मंच
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ रिश्ते तल्ख रहे हैं, लेकिन वैचारिक मतभेदों के बावजूद बृहस्पतिवार को दोनों एक ही मंच पर नजर आए। भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अधिवेशन में दोनों आसपास तो बैठे ही, आपस में बात करते हुए कई बार मुस्कुराते भी देखे गए।
पिछले साल सितंबर के बाद यह पहला मौका था जब दोनों साथ नजर आए। अपने भाषण में ममता ने पीएम से अपील करते हुए कहा कि कृपया बंगाल की ओर भी ध्यान दीजिए। अगर बंगाल का विकास होगा तभी भारत का विकास होगा।