बिहार में चुनावी जीत के बावजूद भी नीतीश की सियासी ताकत कम हुई है। वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश के अपने दल जदयू को बहुमत के करीब 115 सीटें मिली थीं। तो 91 सीटों वाली भाजपा विकास के मजबूत इरादों को लेकर कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रही थी।
मगर अपने नेतृत्व में तीसरा चुनाव जीतकर नीतीश देश की बड़ी शख्सियत तो बन गए हैं। लेकिन उनके सामने चुनौतियां भी बढ़ी हैं।
पिछले चुनाव की अपेक्षा उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर हुई है। जेडीयू को 71 सीटें मिली हैं। मुख्यमंत्री पद पर उनकी पारी 81 सीटों वाले राजद नेता लालू यादव के सहारे चलेगी।