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सरकार के कामकाज में बढ़ेगी राज्य मंत्रियों की भूमिका

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शासन के विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलावों के लिए शीर्ष नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष विचार रखे हैं। तो सरकार भी शासन के कामकाज में राज्यमंत्रियों की भूमिका बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इस प्रयास में महीने के हर बुधवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। इसकी शुरूआत जनवरी 27 से हो जाएगी।
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सरकार के इस कदम को बिहार की सियासी हार के बाद भूल सुधार का प्रयास माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों संघ परिवार ने भी सरकार की कार्यप्रणाली के बारे में पीएम को अवगत कराते हुए सुधार की बात कही थी।

तो बिहार के चुनावी नतीजों के बाद सरकार को भी इस बात का अहसास हुआ है कि पीएम मोदी ने जो काम किए हैं उसका प्रचार-प्रसार निचले स्तर पर नहीं हो पा रहा है। इसलिए सरकार का जोर अपनी योजनाओं के प्रचार प्रसार पर भी है।
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बढ़ाया जा रहा है मंत्रियों का कद

वहीं सरकार के भीतर सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राज्य मंत्रियों का कद भी बढ़ाया जा रहा है। पहले प्रगति के जरिए पीएम ने इन मंत्रियों को कामकाज में साथ जोड़ा। तो अब हर महीने के अंतिम बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक कर वे वरिष्ठ मंत्रियों के साथ राज्य मंत्रियों के भेद को दूर करेंगे।

पीएम का जोर मंत्रियों के बीच समन्वय बैठाने पर है। वरिष्ठ मंत्रियों को वे पहले भी कह चुके हैं कि उन्हें राजग सांसदों से लगातार संपर्क स्थापित करना चाहिए।

बुधवार को सचिवों के दो समूहों ने पीएम मोदी के समक्ष सुशासन और कृषि क्षेत्र की चुनौतियां और उसके उपायों पर विस्तार से विचार रखे हैं। पीएम ने खुद ही नौकरशाहों से विचार साझा करने का आह्वान किया था। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी और मनोहर पर्रिकर के अलावा भारत सरकार के सभी सचिव उपस्थित थे।
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