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किरण के आने से क्या बढ़ीं बीजेपी की उम्मीदें, पढ़ें नया सर्वे

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तो क्या माना जाए दिल्ली विधानसभा चुनाव वाकई में रोमांचक स्थिति में पहुंच गया है? ये सवाल इसलिए क्योंकि आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच दिल्ली की गद्दी को लेकर कांटे की टक्कर नजर आ रही है। इस बात की झलक एक नए सर्वे में देखने को मिली है।
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एबीपी न्यूज़ और नील्सन का ये सर्वे किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने के बाद कराया गया है। जिसमें भाजपा का ग्राफ काफी सुधरा हुआ नजर आ रहा है। हालांकि सर्वे में दिल्ली के मुख्यमंत्री के तौर पर केजरीवाल ही दिल्ली की जनता की पहली पसंद बने हुए हैं। लेकिन किरण बेदी के आने से भाजपा भी काफी मजबूती से ऊपर आई है।

हालांकि एबीपी न्यूज-नील्सन के नए सर्वे में मुख्यमंत्री पद की रेस में अरविंद केजरीवाल सबसे ज्यादा 47 फीसदी वोटरों की पसंद हैं। दूसरी ओर किरण बेदी 44 फीसदी जनता की पसंद हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर कांग्रेस नेता अजय माकन को 7 फीसदी जनता ने पसंद किया है।
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किरण बेदी दूसरे नंबर पर

अगर वोटरों के मिजाज को देखें तो सर्वे में 46 फीसदी जनता ने आम आदमी पार्टी को वोट देने की बात कही है। जबकि 45 फीसदी वोटरों ने भाजपा पर अपना विश्वास जताया है। वहीं कांग्रेस के पक्ष में 8 फीसदी वोट मिले हैं।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात जो इस सर्वे में निकल कर आई है कि भाजपा की ओर से सीएम पद की उम्मीदवार किरण बेदी के मुकाबले में केजरीवाल को महिलाओं ने ज्यादा वोट दिए हैं।

सर्वे में केजरीवाल को करीब 49 फीसदी महिलाएं वोट देने को तैयार हैं। वहीं किरण बेदी को 43 फीसदी महिलाएं वोट देना चाहती हैं।

सर्वे में पूछा गया कि क्या किरण बेदी के सीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने से मतदान पर असर पड़ेगा। इस पर 62 फीसदी जनता का कहना है कि इससे कोई खास असर नहीं पड़ेगा। वहीं 38 फीसदी जनता के मुताबिक इसका असर पड़ेगा।

किरण भाजपा की सीएम पद की उम्मीदवार

सर्वे में जब पूछा गया कि क्या किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने का फैसला सही है। इस पर करीब 33 फीसदी वोटर इसके समर्थन में नजर आए। जबकि 44 फीसदी वोटरों ने किरण को आप में जाने की बात का समर्थन किया है। करीब 23 फीसदी लोगों ने किरण के इस फैसले से कोई असर नहीं पड़ने की बात कही है।

आपको बता दें कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान की 7 फरवरी को होंगे। जबकि 10 फरवरी को नतीजे सामने आएंगे। लोकसभा चुनाव के बाद देश के 4 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा।

जम्मू कश्मीर को छोड़कर तीन राज्यों में भाजपा ने अपने दम या फिर किसी के समर्थन से सरकार बनाई। लेकिन अब मामला देश की राजधानी दिल्ली का है। ऐसे में भाजपा कोई गलती नहीं करना चाहती।

आपको बता दें कि इससे पहले यानी 2013 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को 32, आप को 28, कांग्रेस को आठ सीटें मिली थी। भाजपा बड़ी पार्टी होते हुए भी उस समय आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार ने बना ली थी। हालांकि ये सरकार महज 49 दिन ही चल सकी। इसके बाद से यहां राष्ट्रपति शासन रहा।
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दिल्ली की जंग हुई रोमांचक

पिछले चुनाव के बाद के सियासी हालात को ध्यान में रखते हुए ही इस बार भाजपा ने दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए अपना मास्टर स्ट्रोक खेला। पार्टी ने दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर किरण बेदी को मैदान में उतार दिया।

हालांकि किरण के भाजपा में आने के बाद आए इस ताजा सर्वे में भले ही उन्हें केजरीवाल से पीछे बताया जा रहा हो। लेकिन उनके आने से 'आप' के मत प्रतिशत में असर जरूर आ गया है।

इन सबके बीच आम आदमी पार्टी की ओर से भी एक सर्वे कराया गया है। जिसमें पार्टी ने खुद को 43 सीटें मिलने की बात कही है। दूसरी ओर सर्वे में भाजपा को 27 सीटें दी गई है। 'आप' इस सर्वे का इस्तेमाल राजधानी में चलने वाले ऑटो के पीछे लगा रहा है।

फिलहाल सर्वे के ये आंकड़े जमीन पर कितने उतरते हैं, इसके लिए 10 फरवरी का इंतजार करना होगा। जब जनता का फैसला सबके सामने आएगा।
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