ललित मोदी मामले में तेज राजनीतिक हलचल के बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी काफी दवाब में दिखीं। वे बृहस्पतिवार सुबह राजस्थान पुलिस अकादमी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने पहुंची थीं। उनके चेहरे पर तनाव आसानी से देखा जा सकता था। उनके घर लौटते ही लगभग सभी मंत्रियों व दो दर्जन से अधिक विधायकों तथा पार्टी पदाधिकारियों ने मुलाकात की। प्रदेश में दिन भर राजे के इस्तीफे को लेकर कयास लगते रहे। लेकिन राजे सहित सभी मंत्रियों-विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों ने ललित मोदी मुद्दे पर मौन साधा हुआ है।
राजे सहित मंत्री-विधायक, पार्टी पदाधिकारी हुए मौन
केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी के दो दिन पूर्व राजस्थान दौरे के बाद लग रहा था कि मामला थोड़ा शांत हो जाएगा, लेकिन अब इसने और तूल पकड़ लिया। राष्ट्रीय स्तर पर छाए इस मुद्दे पर राजे की प्रतिक्रिया लेने के लिए सुबह कार्यक्रम में मीडियाकर्मी पहुंचे, तो वर्दीधारी व सादा कपड़ो में उपस्थित सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें काफी दूर रोक दिया। इसके बाद राजे के बंगले पर राजनीतिक बैठकों का दौर चला। इस मुद्दे पर राजे सहित सभी मंत्री, विधायक व पार्टी पदाधिकारी मीडिया से बात करने तक से कतरा रहे हैं।
शक्ति प्रदर्शन की तैयारी तो नहीं
राजे से गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया तो कार्यक्रम में मिल चुके थे, लेकिन मंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़, अरुण चतुर्वेदी, कालीचरण सराफ सहित लगभग सभी मंत्री बंगले पहुंचे। इसके बाद प्रहलाद गुंजल, सूर्यकांता व्यास सहित दो दर्जन से अधिक विधायकों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने भी उनके घर पहुंचकर मुलाकात की।
बैठकों के लगातार ऐेसे दौरों के चलते राजनीतिक हलकों में चर्चा रही कि कहीं ये शक्ति प्रदर्शन की तैयरी तो नहीं है? सूत्रों ने बताया कि सभी मंत्री विधायक राजे को ढाढस बंथाने पहुंचे थे कि वे सभी राजे के साथ हैं। सूत्रों ने बताया कि भविष्य की आशंकाओं को देखते हुए विधायकों से लगातार सम्पर्क साधा जा रहा है।
सफाई के बाद भी नहीं थम रहा मुद्दा
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने आलाकमान को सफाई भी पेश कर दी है, लेकिन मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों ने बताया कि राजे ने आलाकमान को कहा है कि आखिरी पन्ने पर हुए दस्तखत उनके हैं, लेकिन उससे पहले जुड़े पन्नों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने आलाकमान से यह भी कहा है कि इन कागजातों पर वकील के सामने दस्तखत करने के बाद संबंधित जज के सामने भी पेश होना होता है। लेकिन वे जज के सामने उपस्थित होने नहीं गईं। ऐसे में इन दस्तावेजों का कोई वैधानिक महत्व नहीं है।
विपक्ष के हमले जारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि दस्तावेज सामने आने के बाद भी प्रधानमंत्री व अमित शाह मौन हैं। मुख्यमंत्री को तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक इस्तीफा नहीं होगा, तब तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आम जनता ने भी मुख्यमंत्री का सम्मान करना छोड़ दिया है। मुख्यमंत्री का चरित्र दुनिया जानती है।