एक वक्त था जब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में दाखिला लेना अमेरिकी कॉलेज से भी कहीं मुश्किल माना जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है।
देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक आईआईटी को इस साल अपनी सीटें भरने के लिए दाखिले के दूसरे दौर की जरूरत पड़ रही है।
769 ऐसे स्टूडेंट हैं, जिन्हें इन संस्थानों में पढ़ने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने ऐसा फैसला किया, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी। उन्होंने आईआईटी में पढ़ने से मना कर दिया।
दाखिले का पहला दौर खत्म होने के बाद देश के अलग-अलग आईआईटी में सीटें खाली पड़ी हैं, जो दुर्लभ वाकया है। पहले आरक्षित सीटें जरूर खाली रहती थीं, लेकिन जनरल कैटेगरी में सारी सीटें न भरने का यह पहला अनुभव है।
आईआईटी में दाखिले से इंकार की मुख्य वजहों में नए आईआईटी पर पर्याप्त भरोसा न होना और कम मशहूर सेगमेंट में दाखिले के ऑफर मिलने को बताया जा रहा है।
बुधवार से दाखिले का दूसरा दौर शुरू हो रहा है। जेईई (एडवांस्ड) के चेयरमैन एच सी गुप्ता ने कहा, 'सभी श्रेणियों के लिए सैकड़ों सीटें उपलब्ध हैं।'
उन्होंने कहा, 'हालांकि, हर आईआईटी में सीट उपलब्ध हैं, लेकिन ज्यादातर सीटें आईएसएम-धनबाद में खाली हैं। आईटी-बीएचयू (अब आईआईटी) जिसमें पहले तक कई खाली सीट रहती थीं, वहां इस बार ऐसा नहीं है। कुछ सुधार आया है।'