माइक्रो सैटेलाइट ‘जुगनू’ के सफल प्रक्षेपण और बेहतर रिजल्ट देने से उत्साहित इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) ने आईआईटी कानपुर को एक और सैटेलाइट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसका वजन 7-10 किलोग्राम होगा।। इसकी मदद से कृषि और मौसम की सटीक जानकारी हासिल की जा सकेगी। भूगर्भ जल और ऊसर भूमि का डाटा तैयार किया जा सकेगा। आईआईटी के प्रोफेसर एनएस व्यास और उनकी टीम ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। यह दो साल में तैयार हो जाएगा।
नए सैटेलाइट की विशेषता
प्रोजेक्ट से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया कि सैटेलाइट में थर्मल कैमरा लगेगा। इसमें विदेशी लेंस लगाया जाएगा, जो इन्फ्रारेड इमेज भेजेगा। इसके जरिए प्रदूषण, भूगर्भ जल की स्थिति, बारिश, तापमान के बढ़ने-घटने, बाढ़, सूखा, तूफान और भूकंप की सटीक जानकारी हासिल की जा सकेगी। सैटेलाइट से फसल उत्पादित क्षेत्रफल, उपजाऊ मिट्टी और ऊसर भूमि की मैपिंग भी की जाएगी। इसमें लगने वाली जीपीएस की डिब्बी इंग्लैंड या अमेरिका से आएगी, जबकि कैमरा स्वदेशी होगा।
यह सैटेलाइट विश्व का मैपिंग करके रिपोर्ट भेजने में सक्षम होगा। यह पृथ्वी की सतह से 800 किलोमीटर ऊपर रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, नए सैटेलाइट को बनाने में 3 से 3.50 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें से 1 करोड़ रुपये का बजट जल्द ही मिल जाएगा। सेटेलाइट को 2014 तक बनाया जाना है।
पहले भी बनाया उपग्रह
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा सैटेलाइट बनाकर इतिहास कायम किया है। 3 किलोग्राम के माइक्रो सैटेलाइट ‘जुगनू’ का प्रक्षेपण 12 अक्तूबर, 2012 को हुआ था। इसरो के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित सैटेलाइट की उम्र 6-8 महीने की थी, लेकिन वह अब भी काम कर रहा है।