केंद्र सरकार ने पिछले महीने अमेरिकी एजेंसी फोर्ड फाउंडेशन को निगरानी सूची में डाल दिया था। सरकार ने कहा था कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित के कारण ये फैसला लिया गया है।
फैसले के बाद फोर्ड फाउंडेशन से पैसा लेने से पहले केंद्र से अनुमति लेना अनिवार्य हो गया। सत्ता में आने के बाद से ही केंद की नरेंद्र मोदी सरकार का गैर सरकारी सामजिक संगठनों और उनके दानदाताओं के खिलाफ कठोर रवैया रहा।
उसका कहना है कि कई गैर सरकारी सामाजिक संगठन विकास के खिलाफ काम कर रहे है। पिछले महीने यही तर्क देकर उसे ग्रीनपीस इंडिया की विदेश फंडिंग पर भी रोक लगा दी थी। सरकार की यही धारणा फोर्ड फाउंडेशन के बारे में भी रही है। हालांकि फोर्ड फाउंडेशन के चंदों पर गौर करें तो इसने केवल सामाजिक संगठनों को ही सहयोग नहीं किया है, इससे चंदा पाने वालों में आईआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ स्कूल जैसी संस्थाएं भी रही हैं।
देश के 7 संस्थानों ने फोर्ड फाउंडेशन से सहयोग लिया
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, देश के सात जानेमाने संस्थान फोर्ड फाउंडेशन के सहयोग से रिसर्च और स्कॉलरशिप प्रोग्राम चलाते हैं। ये संस्थान 2008 से 2013 के बीच, पांच सालों में 2.5 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि ले चुके हैं।
इन संस्थानों में आईआईटी बांबे, आईआईएम अहमदाबाद, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयूी) बंगलौर, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया, जीबी पंत सोशल साइंस इंस्टिट्यूट और नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च शामिल है।
सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए एनएलएसआईयूी के वीसी आर वेंकट राव ने कहा कि किसी संस्थान को किसी प्रोजेक्ट के लिए फंड लेने से पहले सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा, 'हम एक संवैधानिक संस्था है और हमारे बजट का ऑडिट होता है। पहले दिन से फोर्ड फाउंडेशन हमें फंडिंग करता रहा है।'
जानिए, फोर्ड फाउंडेशन ने किसे दिया कितना पैसा
एनएलएसआईयू में फिलहाल फोर्ड फाउंडेशन के पैसे से दो प्रोजेक्ट और जनहित याचिकाओं की एक पीठ चल रही है। तीन लाख डॉलर का एक प्रोजेक्ट मई 2014 में पूरा होना था, हालांकि उसे दिसंबर 15 तक विस्तार दे दिया गया। दूसरा प्रोजेक्ट छह लाख डॉलर का है, जिससे एक लीगल ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है।
आईआईटी बांबे में 530,000 डॉलर से 2013 में एक प्रोजेक्ट शुरु किया गया था। आईआईएम अहमदाबाद फोर्ड से 2008 में 164,840 डॉलर और 2012 में 150,000 डॉलर ले चुका है।
जेएनयू को फोर्ड ने 2005 और 2011 में दो अनुदान दिए थे। जामिया मिलिया इस्लामिया में फोर्ड के पैसे से एक पीठ चलाई जा रही है। संस्थान फोर्ड से 2013 में 200,000 डॉलर का अनुदान भी ले चुका है।