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अगर कांग्रेसियों को न मारते तो ये कर सकते थे नक्सली

Tue, 04 Jun 2013 12:53 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं सहित 29 लोगों की निर्मम हत्या करने वाला नक्सली गुरिल्ला दस्ता उन्हें बंधक बनाकर केंद्र और राज्य सरकार से अपनी हर मांग पूरी करवा सकता था।
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बजाय बंधक बनाने के नक्सलियों ने ज्यादातर राजनीतिक नेताओं को गोलियों से छलनी कर दिया और कुछ को भागने का मौका देकर जिंदा छोड़ दिया।

नक्सलियों की रणनीति भांप रहीं सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक 150 से 200 नक्सलियों का यह गुरिल्ला दस्ता अपने शीर्ष नेताओं के संपर्क में नहीं था। अगर ऐसा होता तो राज्य कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को बंधक बनाने के इस सुनहरे मौके को छोड़ हत्या करने की इजाजत उन्हें कभी नहीं दी जाती।

इस हालात को सोचकर गृह मंत्रालय के आला अधिकारी अब भी सिहर उठते हैं। अधिकारियों ने गृहमंत्री और सरकार को इस संभावित हालात से अवगत करा दिया है।

सुरक्षा एजेंसियों के रणनीतिकारों का मानना है कि इस हमले से उत्साहित नक्सली फिर ऐसी वारदात कर अपनी इस गलती की भरपाई करने की कोशिश करेंगे।

यही वजह है कि 5 जुलाई को आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक में ऐसे हालात को रोकने पर उच्चस्तरीय बातचीत होगी। खासतौर पर नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग से दो घंटे की बातचीत होगी।
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इस बैठक में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई के आंध्र प्रदेश मॉडल पर चर्चा की जाएगी। गृह मंत्रालय की कोशिश है कि सभी नक्सल प्रभावित राज्य जल्द से जल्द आंध्र प्रदेश मॉडल पर काम शुरू कर दें।

एक उच्चपदस्थ अधिकारी ने बताया कि आंध्र के विशेष दस्ते ग्रेहाउंड्स की सफलता के पीछे राज्य के थानों की मजबूत व्यवस्था मुख्य कारण थी। मंत्रालय के मुताबिक प्रभावित इलाकों में थाने स्तर को मजबूत किए बिना नक्सलियों पर नकेल नहीं कसा जा सकती।

अधिकारी ने बताया कि हालांकि यह कोई नई बात नहीं और मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह बात नई बोतल में पुरानी शराब भरने जैसा होगा। अब जब राजनीतिक नेताओं पर हमले होने शुरू हो गए हैं, तो सभी मुख्यमंत्रियों को यह बात जल्द समझ में आएगी।

केंद्र थानों को मजबूत करने की बात सालों से राज्यों को समझा रहा है। इस काम में राज्य पुलिस की मदद के लिए केंद्र ने सिर्फ बस्तर में अर्धसैनिक बल की 32 बटालियन तैनात कर रखी हैं। लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी की वजह से हालात में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
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अधिकारी के मुताबिक नक्सलियों को अगला मौका मिला तो वह नेताओं को मारने के बजाए उन्हें बंधक बनाकर सरकार से सौदेबाजी करने का मौका नहीं छोड़ेंगे।
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