हर चुनाव में चर्चा का केंद्र बनने वाली अमेठी लोकसभा सीट इस आम चुनाव में कुछ ज्यादा ही चर्चा में है। कारण साफ है, कांग्रेस के युवराज के सामने भाजपा ने टीवी की दुनिया की सबसे चर्चित बहू स्मृति ईरानी को उतारा है।
जबकि आम आदमी पार्टी ने कवि कुमार विश्वास को इस सीट से टिकट देकर मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
अमेठी जाने से पूर्व स्मृति ईरानी ने खुद को राहुल के खिलाफ उम्मीदवार बनाए जाने के कारणों, चुनाव रणनीति और संभावनाओं पर अमर उजाला से खास बातचीत की-
टूटेगा परिवारवाद का साम्राज्य?
प्रश्न- राहुल गांधी कांग्रेस के अघोषित पीएम उम्मीदवार हैं और अमेठी उनका मजबूत किला ऐसे में स्मृति ईरानी का उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का राजनीतिक संदेश क्या है?
पहली बात तो यह है कि अघोषित उम्मीदवार वह होता है जिसे उम्मीदवार घोषित करने की ताकत उस संगठन में नहीं होती। जहां तक मेरे अमेठी आने का सवाल है तो यह कहूंगी कि यहां एक परिवार ने अपना साम्राज्य बना लिया है।
अमेठी की जनता के लिए यह सवाल उठता है कि जो परिवार और सांसद दस साल सत्ता में रहने के बाद भी अपने क्षेत्र का विकास नहीं करा पाया तो जब वह विपक्ष में बैठने जा रहा है तो कैसे विकास करेगा।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि जो अपने क्षेत्र अमेठी की विकास नहीं करा पाया वह देश का कैसे विकास करेगा?
प्रतिभा साबित करने की कोशिश
प्रश्न- आप इससे पहले कभी अमेठी नहीं गईं, फिर एकाएक यह दावा करना क्या सही होगा?
मैं आस पास के इलाके में गई हूं। मुझे लगता है कि मुझे संगठन ने इस योग्य समझा है और मुझ पर भरोसा किया।
सफलता या असफलता की चिंता किए बिना मैंने सिर्फ समय मिलने पर अपनी प्रतिभा साबित करने की कोशिश की।
नामचीन किरदार निभाने के बावजूद मैंने अपने बच्चों की तालीम ऐसे स्कूल से कराई है जहां आपकी हैसियत नहीं देखी जाती बल्कि खुद लाइन में खड़ा हो कर एडमिशन कराना पड़ता है। परिश्रम से तकदीर बनती है सिफारिश से नहीं।
'राहुल ने 10 साल में एक भी सवाल नहीं पूछा'
प्रश्न- गांधी परिवार अमेठी से खुद का पारिवारिक जुड़ाव मानता है और अर्से से यह सीट इस परिवार या इनके करीबियों के पास ही रही है। ऐसे में बाहरी चेहरा चुनौती कैसे देगा?
राहुल गांधी ने भी अमेठी में जन्म नहीं लिया है। उनका नाता इस सीट से महज इतना है कि उनके परिवार के कई सदस्यों ने इस सीट का नेतृत्व किया है। मगर जो लोग रिश्तों की दुहाई देते हैं, वो रिश्तों को निभाने के वचन को भी तो निभाएं।
राहुल ने बीते दस साल में संसद में एक बार भी अपने क्षेत्र की बात नहीं की, जबकि महज ढाई साल की सांसदी में मैंने अपने प्रदेश के 60 मुद्दे संसद में उठाए। राहुल ने केवल दो बार संसद में बात की है।
राहुल ने पांच साल में एक भी सवाल नहीं पूछा है, मैंने ढाई साल में 340 सवाल पूछे हैं। मेरे और राहुल में फर्क यह है कि उनको जब जनप्रतिनिधि बनने का मौका मिला तो किसी प्रश्न का हल नहीं निकाल सके जबकि मैंने ऐसा किया है।
'अबकी बार मोदी सरकार'
प्रश्न- यह आम चुनाव मोदी बनाम राहुल है, मगर कांग्रेस इसे शख्सियत की लड़ाई नहीं बना रही इस रणनीति को टीम मोदी कैसे आंक रही है?
हम इसे सच्चाई से मुंह चुराने से ज्यादा नहीं मानते।
जैसे ही मेरी उम्मीदवारी की घोषणा हुई, अमेठी के एक कार्यकर्ता ने फोन पर कहा कि आपकी एक सज्जन से बात कराता हूं। उस सज्जन के मुंह से एक ही बात निकली- अमेठी है तैयार, अबकी बार मोदी सरकार। यह एक नागरिक कह रहा है, जिसका मुझसे कोई परिचय नहीं है।
अमेठी से मेरी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद मेरी माताजी से किसी परिचित ने संपर्क किया और कहा कि क्या कभी हमारी पीढ़ी ने सोचा था कि एक सामान्य परिवार का बच्चा आज गांधी को चुनौती देगा। मगर आज नरेंद्र मोदी ने यह संभावना प्रस्तुत कर दी है।
'राजनीति मुझे विरासत में नहीं मिली'
प्रश्न- सेलेब्रिटी स्टेटस और सियासी चेहरे की वजह से आपको अमेठी लाया गया है फिर सामान्य पृष्ठभूमि की बात कहां आती है?
सामान्य तो क्या मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद कठिन रही है।जब मेरे माता पिता का ब्याह हुआ तो उनके पास संपत्ति के नाम पर केवल दो पतीले थे। मुनिरका में एक कमरे के शेड में बचपन बीता। 16 साल की उम्र से नौकरी शुरू की थी।
दिल्ली के जनपथ की सड़क के फुटपाथ पर सामान बेचा। 200 रुपये रोजाना कमा अपना सफर शुरू कर आज स्मृति ईरानी यहां पहुंची है और उस गांधी को चुनौती दे रही है जिसे नेतृत्व विरासत में दिया गया है।
राहुल गांधी से सीधे टक्कर
प्रश्न- अमेठी में केवल आपको राहुल ही नहीं प्रियंका के जादू की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा?
मैं केवल इतना जानती हूं कि मैं राहुल गांधी से सीधे टक्कर लेने जा रही हूं।
जहां तक मिसेज वाड्रा का सवाल है तो यह परिवार वहां किस किस को उतारेगा यह उसका विशेषाधिकार है। मिसेज वाड्रा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी उतरी थीं। सबको पता है कि इन चुनाव में अमेठी और रायबरेली में क्या हुआ।
'जाति बताने से बिजली और सड़कें नहीं आतीं'
प्रश्न- पहले अमित शाह प्रभारी के तौर पर फिर वाराणसी से मोदी और अब अमेठी में आप तो क्या गुजरात यूपी में उतर नहीं गया है?
राजनीतिक महत्व होने के बावजूद विकास के मामले में यूपी बेहद पिछड़ा है।
जैसा कि अटलजी ने कहा था कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से हो कर जाता है। इसलिए यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस के अघोषित गठबंधन को ध्वस्त कर लोकसभा ही नहीं अगले विधानसभा चुनाव में हम बदलाव लाएं।
बाहरी की बात रही तोक्या मुझे यह बताना होगा कि मेरे दादा मुरादाबाद के थे। मेरे पिता ठाकुर हैं और मां ब्राह्मण। क्या इससे सड़कें बनने लगेंगी या बिजली आ जाएगी।
मजहबी ध्रुवीकरण
प्रश्न- यूपी में मजहबी ध्रुवीकरण की राजनीति को इस बार भी सभी पार्टियों की ओर से हवा आखिर क्यों दी जा रही है?
ऐसा न हो इसलिए नरेंद्र भाई विकास की बात कर रहे हैं क्योंकि बिजली या सड़क किसी एक धर्म विशेष के तो काम आएगा या नहीं।
जाति और धर्म के आधार पर कांग्रेस ने हमेशा बंटवारे की राजनीति की है। इसमें सपा और बसपा उसकी बराबर की साझेदार है।