हारे तो किरण बेदी और जीते तो नरेंद्र मोदी। भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी बेदी को अचानक सीएम पद का उम्मीदवार बना कर 'चित भी मेरी और पट भी मेरी' दांव चल दिया है।
हालांकि पार्टी ने जीत मिलने की स्थिति में इसका श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी की झोली में डालने की भी तैयारी कर रखी है।
पार्टी की योजना पीएम की 4 में से दो रैलियां चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कराने की है। इसके अलावा पार्टी के पोस्टरों में पहले से ही मोदी छाए हुए हैं।
उधर बेदी को सुरक्षित सीट से चुनाव मैदान में उतार कर पार्टी ने उन्हें चुनाव प्रचार में पूरी तरह से झोंकने का साफ संदेश दिया है। ऐसी स्थिति में अनुकूल परिणाम आने पर जहां इसका श्रेय पीएम मोदी को भी मिलेगा, वहीं प्रतिकूल परिणाम आने पर इसका ठीकरा बेदी पर आराम से फोड़ा जा सकेगा।
बेदी को लेकर तैयार नहीं थी भाजपा
सोमवार देर रात हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में इसी रणनीति के तहत बेदी को परोक्ष की जगह सीधे सीएम पद का प्रत्याशी बनाया गया।
इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने संघ के करीबी और मोदी के विश्वस्त को सरकार की कमान देने की नई नीति से न केवल पीछा छुड़ाया बल्कि बेदी की उन तीखी आलोचनाओं को भी भुला दिया, जिसमें उन्होंने सीधे पीएम मोदी पर निशाना साधा था।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि बेदी को अचानक चेहरा बनाने का फैसला एकाएक हुआ। बेदी इससे पहले भी भाजपा में आने के लिए तैयार थी, मगर तब पार्टी उनकी चेहरा बनाए जाने की शर्त स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।
इसी बीच आम आदमी पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पर बढ़े हमले और इससे पहले मोदी की रैली में अपेक्षाकृत भीड़ न जुटने के बाद अचानक बेदी को उन्हीं की शर्तों पर लाने का फैसला हुआ।
पीएम मोदी की बात से राजी हुईं बेदी
बेदी पीएम की ओर से सीएम पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव मान लेने के बाद ही राजी हुईं। हालांकि तब यह फैसला नहीं हो पाया था कि इसकी घोषणा चुनाव से पहले की जाए या फिर बाद में।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आंतरिक रिपोर्ट में बेदी को चेहरा बनाए जाने के बाद तेजी से ग्राफ बढ़ने संबंधी रिपोर्ट के मिलने के बाद नेतृत्व ने उन्हें सीधे सीएम पद का प्रत्याशी घोषित करने का मन बना लिया।
बताते हैं कि संसदीय बोर्ड की बैठक में बमुश्किल इस मुद्दे पर 10 मिनट ही चर्चा हुई। जेटली ने बेदी को सीधे उम्मीदवार घोषित करने की दलील दी और पीएम ने इस दलील पर तत्काल अपनी सहमति जता दी थी।