राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जब दावा कर रहे हैं कि 1990 में बिहार में लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा रोकने और आडवाणी को गिरफ्तार करने का साहस उन्होंने किया था, तब जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने उनके इस दावे की हवा निकालते हुए कहा है कि लालू ने यह काम उनके निर्देश पर किया था।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में शरद यादव ने कहा कि लालू तब बिहार के मुख्यमंत्री थे और वह खुद केंद्र में मंत्री और जनता दल के प्रधान महासचिव थे और लालू उनके ही निर्देश पर काम कर रहे थे।
शरद यादव ने कहा कि मीडिया ने सारा श्रेय लालू को दिया और खुद वह भी इस मुद्दे पर चुप रहे।
लेकिन हकीकत यही है कि लालू आडवाणी को गिरफ्तार करने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे, तब उन्होंने ही कठोर शब्दों में लालू से आडवाणी को गिरफ्तार करने को कहा था।
शरद ने कहा कि उन्हें पता था कि आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा केंद्र की जनता दल सरकार से समर्थन वापस ले लेगी और सरकार नहीं बचेगी, लेकिन इसके बावजूद सिद्धांतों के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।
भाजपा के नीतीश पर विश्वासघात के आरोप को अनुचित बताते हुए शरद यादव ने कहा कि हमने एक साथ मिलकर 17 साल काम किया है, इसलिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालने से कोई लाभ नहीं होगा।
हम वैचारिक आधार पर मजबूरी में अलग हुए हैं, इसलिए दोनों के हित में है कि अपनी अपनी दिशा में काम करें। कांग्रेस से गठबंधन के सवाल पर शरद ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता 19 जून को नीतीश सरकार के विश्वास मत को पारित कराना है।
इसके बाद पार्टी केसभी नेता मिल बैठकर आगे की रणनीति तय करेंगे।