नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन की एक चिट्ठी ने देश की केंद्र सरकार को एक बार फिर से कठघरे में खड़ा कर दिया है। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने नालंदा विश्वविद्यालय चांसलर (कुलाधिपति) के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल के लिए अपना नाम वापस ले लिया है। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के मुताबिक नरेंद्र मोदी सरकार नहीं चाहती है कि वह नालंदा विश्वविद्यायल के कुलाधिपति के पद पर रहें।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने विश्वविद्यालय के गवर्निंग बोर्ड को लिखे पत्र में कहा कि एक महीने पहले उनके नाम की सिफारिश किए जाने के बावजूद सरकार की ओर से उसका नाम सरकार की तरफ से नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की तरफ से उनके नाम को मंजूरी नहीं मिल रही है।