बिहार विधानसभा के स्पीकर उदय नारायण चौधरी ने कहा है कि अगर मांझी ने उनकी वजह से इस्तीफा दिया है तो वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने मांझी के शक्ति परीक्षण की कवायद के सिलसिले में उठाए गए कदमों को सही, संवैधानिक और नियमों के मुताबिक करार दिया।
चौधरी ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि मैंने मांझी के आरोपों के बारे में सुना है। मांझी ने कहा कि उन्होंने मेरी वजह से इस्तीफा दिया। अगर यह सही है तो मैं खुद को किस्मत वाला समझता हूं।
गौरतलब है कि मांझी ने शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कहा था कि जब यह साफ हो गया कि स्पीकर नीतीश कुमार के इशारे पर काम कर रहे हैं और गुप्त मतदान की अनुमति नहीं देने वाले हैं तो उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया था। उनके विधायकों को जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। लिहाजा खून-खराबा रोकने के लिए उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
स्पीकर ने रविवार को मांझी के उस बयान पर अचरज जताया जिसमें उन्हें अपनी हत्या की आशंका जताई थी। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन का मुखिया मुख्यमंत्री ऐसी बात कह रहा हो तो बिहार के 11 करोड़ लोगों का क्या हाल होगा। इसका मतलब मांझी खुद राज्य में शासन व्यवस्था की खराब हालत को स्वीकार कर रहे हैं।
मांझी अपनी पार्टी बनाने के मूड में
कार्यवाहक मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी 28 फरवरी को अपना नया दल बनाएंगे। इस संबंध में उन्होंने आज इशारों-इशारों में बस इतना कहा कि वो अपना फैसला स्वतंत्र रूप से लेंगे और मांझी किसी का चमचा नहीं बनेगा। संकेत साफ है, मांझी आगे का सफर अपनी नाव पर ही पूरी करेंगे।
वैसे मांझी खेमे के विधायक राजीव रंजन की मानें तो इसकी रूपरेखा तैयार हो चुकी है। पटना में 28 फरवरी को इसकी पहल होगी और एक मार्च से राज्यभर में व्यापक अभियान चलाया जायेगा। पिछले दिनों एक अन्य विधायक नरेंद्र सिंह ने भी दावा किया था कि उनके दल के मांझी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। वृशिण पटेल ने भी आज कहा कि वो बेघर हैं और नया घर बनायेंगे।
माना जा रहा है कि राजद सांसद पप्पू यादव भी मांझी के साथ खडे हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो बिहार में नई राजनीतिक और सामाजिक समीकरण पैदा होगी, जो राजद-जदयू को ही नहीं, बल्कि भाजपा को भी परेशान कर सकती है। निश्चित तौर पर महादलित वोटों में मांझी का उभार बिहार की राजनीति को प्रभावित करेगा।
ऊपर से जगन्नाथ, वृशिण, पप्पू व शाहीद की जुगलबंदी से उत्तर बिहार की पूरी राजनीति बदल सकती है। मांझी अपने इन सहयोगियों के बूते इतने सक्षम हैं कि वे अलग रास्ता अख्तियार कर भाजपा या जनता दल परिवार को बहुत सारी सीटों पर हरा सकते हैं। मांझी की पार्टी आनेवाले चुनाव में सभी दलों के बागियों का सबसे बड़ा ठौर भी होगा।