आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुए दो बम धमाकों की साजिश के सुराग ढूंढने में जुटी पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने सोमवार को करीब 40 लोगों से पूछताछ की।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो आंध्र प्रदेश पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने 30-40 लोगों से गहनता के साथ पूछताछ की। बृहस्पतिवार को हुए बम धमाकों में 16 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
सूत्रों ने बताया कि दिलसुखनगर में हुए बम धमाकों से ठीक पहले स्थानीय लॉज से पांच लोगों ने चेकआउट किया था। इन पांच लोगों में से दो लोग निर्दोष साबित हुए। हालांकि इनमें से एक व्यक्ति ने फर्जी नाम से होटल का कमरा बुक कराया था, जिससे उस पर शक गहरा गया।
मगर उसने पुलिस को बताया कि वह अपनी दोस्त के साथ होटल में आया था और अपनी पहचान छिपाना चाहता था। जांच के बाद पुलिस ने पाया कि वह सही बोल रहा है, इसलिए उसे और उसकी दोस्त को छोड़ दिया गया। हालांकि अन्य तीन व्यक्तियों के बारे अभी कुछ पता नहीं चल सका है।
इस बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने बताया कि घटना स्थल से इकठ्ठा किए गए सभी सुबूतों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है और नोडल एजेंसियां इन्हें देख रही हैं। इसके अलावा पुलिस ने दिलसुखनगर में लगे मोबाइल फोन टावरों के जरिए कॉल डाटा ट्रांसमिशन को इकठ्ठा करना शुरू कर दिया है।
सीसीटीवी फुटेज में मुंबई लैब की ली जा सकती है मदद
घटना स्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज को ज्यादा स्पष्ट करने के लिए उसे मुंबई की एडवांस फिल्म प्रोसेसिंग लैब में भेजा जा सकता है। सीसीटीवी में तीन लोग संदिग्ध तरीके से साइकिल स्टैंड के पास घूमते दिख रहे हैं। लेकिन स्थानीय लैब में भेजे जाने के बाद भी उसकी क्वालिटी में सुधार नहीं है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
रिमोट से नहीं किया गया ब्लास्ट
जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि दिलसुखनगर में दोनों ब्लास्ट में रिमोट कंट्रोल का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि इसके लिए टाइम बम का उपयोग किया गया है। सूत्रों ने बताया कि पहले ब्लास्ट के बाद पूरे क्षेत्र में वेवस और फ्रिक्वेंसी प्रभावित हो गई थी। ऐसे में रिमोट के जरिए दूसरा ब्लास्ट करना मुश्किल हो जाता। इसलिए बम को टाइमर के जरिए उड़ाया गया था।