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कुछ यूं है हमारे देश में टैक्स का तिलिस्म

Mon, 25 Feb 2013 09:02 PM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
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देश के हर व्यक्ति को किसी न किसी रूप में टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। सरकार कई तरह के टैक्स वसूलती है, जिन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहला प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) और दूसरा अप्रत्यक्ष कर (इन डायरेक्ट टैक्स)।
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प्रत्यक्ष कर
यह वह कर है जिसे हर उद्यमी, कारोबारी, कंपनी और हर व्यक्ति को अपनी आमदनी या संपत्ति पर देना पड़ता है। इसे प्रत्यक्ष कर इसलिए कहते हैं क्योंकि, इसमें जो व्यक्ति कर का भुगतान करता है, उसे ही कर का भार वहन भी करना पड़ता है। प्रत्यक्ष कर में शामिल प्रमुख कर-

कॉरपोरेट टैक्स
यह वह कर होता है, जिसे उद्योग जगत को अपने मुनाफे पर चुकाना पड़ता है। सरकार के कर संग्रह का यह अकेला सबसे बड़ा स्रोत है।

कॉरपोरेट टैक्स के अलावा अन्य आय पर कर
इसे आयकर कहते हैं, जिसे गैर कॉरपोरेट करदाता जैसे कि व्यक्तिगत और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) को अपनी आमदनी पर देना होता है।

सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी)
शेयर बाजार में इक्विटी की खरीद-बिक्री या म्यूचुअल फंड में लेन-देन करने पर भुगतान या प्राप्त हुई कुल रकम पर लगने वाला टैक्स एसटीटी होता है।

संपत्ति कर
यह वह कर होता है, जिसे प्रत्येक व्यक्तिगत करदाता को अपनी कुल संपत्ति पर भुगतान करना होता है। एचयूएफ या कंपनियों को 30 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध संपत्ति पर 1 फीसदी की दर से संपत्ति कर का भुगतान करना होता है।
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कैपिटल गेन टैक्स
शेयर, मकान, व्यावसायिक संपत्ति जैसे कैपिटल एसेट की बिक्री पर मिलने वाली रकम या मुनाफे पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। लांग टर्म कैपिटल गेन 10 फीसदी की दर से देना होता है, जबकि शार्ट टर्म कैपिटल गेन पर करदाता के आयकर स्लैब के अनुसार लगता है।

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी)
निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड करमुक्त होता है। लेकिन, कंपनियों को निवेशकों के दिए गए डिविडेंड पर सरकार को कर का भुगतान करना होता है, इसे ही डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स कहते हैं।

मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट)
यदि किसी कंपनी ने मुनाफा दर्ज किया, लेकिन कर का भुगतान नहीं किया हो तो प्राय: ऐसी स्थिति में कंपनियों को एक निश्चित न्यूनतम टैक्स का भुगतान अपने दर्ज मुनाफे पर करना होता है।

विद्होल्डिंग टैक्स
यह वह कर है जिसकी कटौती डिविडेंड, ब्याज या फिर कैपिटल गेन आदि से किसी व्यक्त को होने वाली आमदनी के भुगतान पर की जाती है।

अप्रत्यक्ष कर
हम जिस किसी भी वस्तु या सेवा की खरीद पर व्यय करते हैं, उस पर सरकार टैक्स वसूलती है। इनमें उत्पाद, सीमा और सेवा शुल्क शामिल होते हैं। इसे अप्रत्यक्ष कर इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस कर का भुगतान उन कंपनियों को करना होता है जो अपने उत्पाद या सेवाएं बेचती हैं। लेकिन, कंपनियां यह कर उपभोक्ताओं से लेती हैं। यह एक तरह का प्रतिगामी (रिग्रेसिव) कर है, जिसे हर व्यक्ति को चाहें वह अमीर हो या गरीब समान रूप से देना होता है। सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का प्रस्ताव रखा है, जो कई तरह के अप्रत्यक्ष करों की जगह लेगा।

सीमा शुल्क
विदेशों से किसी भी वस्तु की खरीद और देश में उसकी बिक्री पर सीमा शुल्क लगता है। इसके दो लाभ होते हैं। पहला इससे सरकार की कमाई होती है और दूसरा इससे भारतीय इंडस्ट्री को प्रोटेक्शन मिलता है।

केंद्रीय उत्पाद शुल्क
यह केंद्र सरकार की ओर से देश में बनने वाले हर उत्पाद पर लगाए जाने वाला कर होता है।

सेवा कर
यह सर्विसेज यानी सेवाओं के बदले लगने वाला कर है।

जीएसटी
कई अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर इकलौती अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था बनाए जाने के तहत सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का प्रावधान किया है। सरकार का मानना है कि जीएसटी से कर प्रशासन प्रभावकारी बनेगा, इसका अनुपालन आसान होगा और कर चोरी मुश्किल हो जाएगी।
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