देश का नौजवान तबका भले आधुनिकता को लेकर कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें क्यों न करे, लेकिन नकाब हटता है, तो अंदाजा होता है कि इस वर्ग की सोच भी बूढ़ी ही है।
दिल्ली में पिछले साल हुए गैंगरेप के बाद ऐसा लगा कि समाज का रुख महिलाओं को लेकर बदल रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है।
एचटी-मार्स पोल के मुताबिक 64.4 फीसदी लोग चाहते हैं कि उनकी शादी किसी वर्जिन से हो। लेकिन 44.3 फीसदी के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप में कोई दिक्कत नहीं है और 55.9 फीसदी लोगों का मानना है कि शादी से पहले सेक्स अब कोई बड़ा मुद्दा नहीं रह गया है।
यानी युवाओं का बड़ा हिस्सा शादी से पहले सेक्स के लिए तैयार है, लेकिन वह यह भी चाहता है कि जिससे भी उसकी शादी हो, उसे शादी से पहले किसी से सेक्स न किया हो।
महिलाओं को लेकर पुरुषों की सोच में कितना बदलाव आया है, जरा इस पर भी गौर कीजिए। सर्वे में शामिल 37.1 फीसदी पुरुषों का कहना था कि आसपास से गुजरती लड़कियों को देखकर सीटी बजाना या कमेंट सिर्फ मजे के लिए है और इससे कोई नुकसान नहीं होता।
यह सर्वे 14 शहरों के 5,012 लोगों को सैम्पल बनाकर किया गया, जिनकी उम्र 18 से 25 साल के बीच थी। इस पोल में दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, चंडीगढ़, कोलकाता, पटना, रांची, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, इंदौर, चेन्नई, बंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।
मॉडर्न बनने की हरसंभव कोशिश करने वाले नौजवान बदलाव को लेकर कोई खास गंभीरता नहीं रखते। ज्यादातर युवा अपनी जाति से बाहर या निचली जाति में शादी करने के लिए तैयार नहीं हैं।
66.2 फीसदी निचली जाति के लड़के या लड़की को जीवनसाथी बनाने को तैयार नहीं, जबकि 72.6 फीसदी दूसरी जाति में रिश्ते नहीं बनाना चाहते। लेकिन चीट करने में नौजवान आगे हैं। 24.5 फीसदी लोगों ने माना कि उन्होंने अपने साथी को कभी न कभी धोखा जरूर दिया है।