प्रवीण मनवरे अपनी पत्नी और दो बेटियों को जिंदा जलाने के आरोप में जेल में बंद है।
तकरीबन 10 दिन पहले एनटीपीसी के इंजीनियर प्रवीण मनवरे ने पुलिस को बताया कि उसने पत्नी और दो बेटियों को कार में बंद करके जिंदा जला दिया। उसने बताया कि वह एचआईवी पॉजिटिव है और उससे ये बीमारी उसकी पत्नी और बेटियों को भी लग गई। एड्स जैसी बीमारी के साथ जीना मुश्किल था, उसने और उसकी पत्नी ने फैसला किया कि वे बेटियों समेत आत्महत्या कर लेंगे। पत्नी और बेटियों को अपनी वैगन आर कार में बंद कर उसने आग लगा दी। आग की लपटों में वे तीनों जल गए। पत्नी के साथ आत्महत्या करने का फैसला करने वाला प्रवीण वहीं खड़ा देखता रहा।
वारदात के हफ्ते भर बाद उसने महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक पुलिस थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। फिलहाल वह मध्य प्रदेश की बेतूल जिले की मुल्ताई जेल में बंद है।
(तस्वीर में प्रवीण अपनी बेटियों के साथ। तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस से ली गई है।)
10 मार्च को प्रवीण ने किया था समर्पण
प्रवीण मनवरे (39 साल) ने आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की है और एनटीपीसी में इंजीनियर है। उसकी पत्नी शिल्पा भी इंजीनियर थी, हालांकि वह नौकरी नहीं करती थी, बल्कि हाल ही में उसने कहा था कि वह नौकरी करना चाहती है। दोनों की शादी 2003 में हुई, दोनों की दो बेटियां- शरवरी और परिणीति थीं।
10 मार्च को जब उसने पत्नी और बेटियों को मारने की कहानी सुनाई तो पुलिस को एक बारगी यकीन नहीं हुआ। तीन मार्च को वह अपनी वैगन आर कार से पत्नी और बेटियों के साथ अमरावती से लौट रहा था। महाराष्ट्र के वरूद और मध्य प्रदेश के प्रभात पट्टन के बीच 6 किमी का घाट है। उस रास्ते में कई ऐसे बोर्ड दिखाई दे सकते हैं, जिस पर लिखा है- आगे अंधा मोड़ है।
तीन मार्च को प्रवीण इसी रास्ते से अमरावती से वापस लौट रहा था। एक सुनसान मोड़ पर, आधी रात के आसपास उसने अपनी कार में आग लगा दी और उसे खाई में ढकेल दिया। कार में उसकी पत्नी शिल्पा (38 साल), बेटी शरवरी (9 साल) और परिणीति (2 साल) बंद थीं।कार में प्रवीण भी था, लेकिन अंतिम समय में वह डर गया और बाहर निकल आया। बाहर आकर अपनी पत्नी और बेटियो को जलता हुआ देखता रहा।
(तस्वीर में प्रवीण पत्नी के साथ। तस्वीर इंडियन एक्सप्रेस से ली गई है।)
पुलिस को नहीं प्रवीण की कहानी पर यकीन
एक सप्ताह तक किसी को उन हत्याओं की खबर भी नहीं लगी। हफ्ते भर बाद यानी 10 मार्च को प्रवीण खुद ही पुलिस थाने गया और वारदात की जानकारी दी। हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर यकीन नहीं है। प्रवीण की पत्नी और बेटियों का एचआईवी टेस्ट कराया गया। तीनों नेगेटिव पाए गए।
प्रवीण की पत्नी के परिजनों को भी उसकी कहानी पर भरोसा नहीं है। शिल्पा के भाई अजय ढांके और उनकी पत्नी शारदा का कहना है कि प्रवीण ने किसी और कारण से हत्या की है। शारदा ने कहा, 'आरोपी जो बता रहा है, हत्या का वह मकसद नहीं है। वह घटनास्थल से भाग गया था और उसने कानूनी सलाह ली।' अजय और शारदा अमरावती में रहते हैं।
शिल्पा के परिजनों को प्रवीण से ऐसी चिढ़ हो गई है कि, वे उसे नाम से भी नहीं बुलाते, बल्कि आरोपी कहते हैं। शिल्पा के एक अन्य भाई संजय का कहना है कि प्रवीण ने सभी को या तो जहर दिया या नशीली दवा दी। उसके बाद उसने कार को खाई में ढकेल दिया। संजय खुद भी टेक्सटाइल इंजीनियर है और मुंबई मे रहते हैं।
शिल्पा ने बहन से की थी आखिरी बार बात
आरजू् शिल्पा की बहन हैं। संभवतः वह अखिरी व्यक्ति हैं, जिन्होंने शिल्पा से बात की थी। उन्होंने कहा कि दोपहर 2 बजकर 45 मिनट के आसपास उन्होंने शिल्पा को फोन किया था। उस वक्त शिल्पा ने कहा कि वे सो रही है। बात नहीं कर सकती।
परिजनों ने बताया कि 2004 में शरवरी के पैदा होने के बाद प्रवीण और शिल्पा के मयके के लोगो के संबंध तल्ख हो गए। उस समय प्रवीण चाहता था कि शिल्पा की डीलिवरी किसी निजी अस्पताल में हो, जबकि शरवरी अमरावती के सरकारी अस्पताल में पैदा हुई। प्रवीण उसके बाद कभी-कभार ही अपने ससुराल गया, हालांकि शिल्पा अक्सर अमरावती जाती रही।
5-6 साल पहले प्रवीण ने अमरावती के शंकरगढ़ में अपने सास-ससुर के लिए दो बेडरूम का एक फ्लैट भी खरीदा। उसने हाल ही में एक बड़ा फ्लैट भी बुक किया था। परिजनों का कहना है कि शिल्पा ने कभी ये नहीं कहा कि प्रवीण उसे प्रताड़ित करता है।
10 साल से NTPC में नौकरी कर रहा था प्रवीण
प्रवीण की गिरफ्तारी पर उसकी मां ने कहा कि वह उनकी संतानों में सबसे खुशहाल था। पता नहीं कैसे वह इन चीजों में फंस गया। गिरफ्तारी के बाद मां की तबीयत भी खराब रहने लगी है।
प्रवीण के पिता ज्ञानदेव केंद्रीय विद्यालय में अध्यापक थे, हालांकि शरवरी के जन्म के एक साल बाद ब्रेन हैमरेज से उनकी मौत हो गई। उसका परिवार अमरावती से 70 किमी दूर कारंजा लाड में रहता है।
प्रवीण अपने भाई-बहनों में सबसे छोटा है। अमरावती के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और आईआईटी, खड़गपुर से उसने पढ़ाई की। लगभग 10 साल से वह एनटीपीसी में नौकरी कर रहा था।
28 मार्च को छतरपुर से अमरावती के लिए निकले थे
प्रवीण के परिजनों का कहना है कि उसे अपनी दोनों बेटियों से बहुत प्यार था, विशेषकर छोटी बेटी से। छतरपुर में प्रवीण के साथ काम करने वालों ने बताया कि वह स्वभाव से बहुत ही शांत था। व्हाट़्सऐप पर अगर अश्लील जोक भेजो तो बिगड़ जाता। वह कहता कि उसकी बेटी भी मोबाइल देखती है। प्रवीण ने दो महीने पहले अपना फेसबुक अकाउंट भी बंद कर दिया था।
28 फरवरी को उसने अपने दोस्तों को संदेश भेजा कि वह परिवार के साथ कार से अमरावती जा रहा है। छतरपुर से अमरावती की दूरी आठ सौ किमी है, इतनी लंबी दूरी कार से तय करने पर किसी को अचंभा नहीं हुआ क्योंकि वह साल मे दो बार जरूर इतनी लंबी ड्राइव करता था। एक बार गर्मी की छुट्टियों में और एक बार दीवाली पर।
छतरपुर से अमरावती के लिए वे शाम को निकले। पुलिस ने जांच में पाया कि उसी के बाद दोनों का फोन स्विच्ड ऑफ हो गया। चार मार्च को प्रवीण के व्हाट्सएप ग्रुप के दोस्तों को लगा कि उसने कई दिनों से संपर्क नहीं किया। उसके बाद ग्रुप के एक दोस्त ने उसके घर वालों से संपर्क किया।
उस समय प्रवीण की आंटी ये सुनकर हैरान रह गईं कि वह अमरावती में है। प्रवीण ने अमरावती पहुंचने के बाद किसी से संपर्क नहीं किया। वे शंकरगढ़ के अपने फ्लैट में दो दिन रहे और बाहर से मंगा कर खाना खाया।
जीबी रोट की वेश्याओं के पास था प्रवीण का आनाजाना
प्रवीण को आशंका थी कि वह एचआईवी पॉजिटिव है। एक समाचार पत्र को उसने बताया कि डेढ़ साल पहले दिल्ली की जीबी रोड इलाके की वेश्याओं के पास आनाजाना शुरु किया। वह जब भी ऑफिसियल ट्रिप पर दिल्ली आता तो जीबी रोड जरूर जाता।
उसे कुछ दिनों बाद अल्सर हो गया। आशंका हुई कि उसे एड्स हो सकता है। उसने छतरपुर की एक लैब में टेस्ट कराया और पॉजिटिव निकला। प्रवीण ने बताया कि वह किसी बड़े शहर में अपना टेस्ट कराना चाहता था, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई।
उसने बताया कि वह परेशानी को अपनी मां को भी बताना चाहता था, लेकिन वहां भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। प्रवीण ने बताया कि 28 फरवरी को अमरावती के लिए निकलने से कुछ दिन पहले उसने दिल्ली में एड्स पर आधारित के सत्र में भी हिस्सा लिया था।
प्रवीण ने एड्स के बारे में अधिकांश जानकारियां गूगल से जुटाई। उसने बताया कि गूगल पर वह एड्स के लक्षणों जितना पढ़ता, उसके मन में सबकुछ खत्म करने की इच्छा उतनी ही बलवती होती जाती।
प्रवीण का शिल्पा में भी दिखने लगे थे एड्स के लक्षण
प्रवीण को बाद में एड्स के लक्षण अपनी पत्नी शिल्पा में भी दिखने लगे। उसने बताया कि उसने अपनी पत्नी में अल्सर, वेट लॉस और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण देखे। फरवरी के आखिरी हफ्ते में उसने पत्नी को अपनी बीमारी के बारे में बताया। प्रवीण ने कहा कि उससे ये बीमारी उसे भी लग गई होगी। शिल्पा उस वक्त प्रवीण से बहुत लड़ी।
हालांकि कुछ दिनों बाद उसने समझौता कर लिया। दोनों के बीच चर्चा हुई कि क्या किया जाना चाहिए? उस समय आत्महत्या करना तय किया गया। प्रवीण ने कहा कि शिल्पा ने उस समय कि कहा कि आज तो लोग हमारे प्रति सहानुभूति दिखा देंगे, लेकिन इससे हमारी और बेटियों की बदनामी ही होगी।
तीन मार्च शाम चार बजे के आसपास प्रवीण अमरावती से छतरपुर के लिए अपनी वैगन आर कार से निकला। रास्ते में उसी कार में जलकर उसकी पत्नी और बेटी की मौत हुई। उसने कहा कि आत्महत्या करने के लिए बहुत साहस चाहिए होता है। मैंने देखा था, पांच से 10 मिनट में मेरी पत्नी और बेटियां मर गई थीं।
'मेरा सबसे बड़ा दुख कि मैं आत्महत्या नहीं कर पाया'
प्रवीण ने बताया कि पास के एक पेड़ से उसने फांसी लगाने की कोशिश भी की, लेकिन शर्ट फट गई। वारदात के बाद वह पैदल ही वरूद की ओर चला गया। चार-पांच दिनों तक वह नागपुर और नासिक में घूमता रहा।
उसने बताया कि उसके पास 3500 रुपए थे। उसने एक चप्पल खरीदी, ट्रेन का टिकट लिया। उसके दिमाग में लगातार यह चल रहा था कि उसे आत्महत्या करनी है। हालांकि उसे आत्महत्या करने के लिए जगह नहीं मिल पाई।
प्रवीण ने बताया कि वह जहां भी जाता, इर्दगिर्द लोग ही लोग होते। मैंने चाहता था कि मैं रात में आत्महत्या करूं ताकि कोई मुझे बचा ना सके। प्रवीण ने कहा कि उसने डूब कर मरने की सोची, ट्रेन से कूदने की सोची, कलाई की नस काटने की सोची, लेकिन वह कुछ भी करने का साहस नहीं जुटा पाया।
प्रवीण ने कहा कि मेरा सबसे बड़ा दुख यही है कि मैं आत्महत्या नहीं कर पाया।