सुप्रीम कोर्ट ने 1993 दिल्ली धमाकों के दोषी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकी देविंदर पाल सिंह भुल्लर की याचिका खारिज करते हुए उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी है।
अदालत ने फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील करने से साफ इनकार किया। अदालत के इस फैसले से भुल्लर को फांसी देने का रास्ता साफ हो गया।
देविंदर पाल सिंह भुल्लर
देविंदर पाल सिंह भुल्लर ने लुधियाना के गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके पिता पंजाब के ऑडिट विभाग में सेक्शन अफसर और माता पंजाब ग्रामीण विकास में सुपरवाइजर थीं।
आतंकी गतिविधियां
--11 सितंबर 1993: दिल्ली के रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस मुख्यालय के पास हुए बम ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 30 लोग घायल हुए थे। यह बम विस्फोट तत्कालीन युवक कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाकर किया गया था।
घटना के समय बिट्टा अपनी कार से वहां से निकल रहे थे और धमाके में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हमला एक रिमोट बम के जरिए किया गया था। भुल्लर पर और भी कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप भी था।
--29 अगस्त 1991: चंडीगढ़ में एसएसपी सुमेध सिंह सैनी की कार को विस्फोट से उड़ा दिया गया था जिसमें एसएसपी का सुरक्षाकर्मी मारा गया। इसमें भी भुल्लर का नाम आया था। जांच के दौरान पाया गया कि वे खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के कट्टर समर्थक थे।
बम धमाके के बाद भुल्लर जर्मनी चला गया और वहां की सरकार से राजनीतिक शरण मांगी, लेकिन जर्मन सरकार ने उनकी अपील ठुकरा दी जिसके बाद उन्हें भारत प्रत्यार्पित कर दिया गया।
टाइमलाइन
--19 जनवरी 1995: भुल्लर को जर्मन अधिकारियों ने भारत को सौंपा।
--25 अगस्त 2001: दिल्ली के टाडा कोर्ट ने भुल्लर को मौत की सजा सुनाई।
--26 मार्च, 2002: शीर्ष अदालत ने भुल्लर की ओर से दायर अपील याचिका खारिज कर दिया।
--17 दिसंबर, 2002: इसके बाद उसने पुनर्विचार याचिका दायर की जिसे भी खारिज कर दिया गया।
--14 जनवरी 2003: राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका पेश की।
--12 मार्च, 2003: भुल्लर ने तब क्यूरेटिव याचिका दायर की जिसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
--12 मई, 2003: सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की ओर से दायर उपचारात्मक याचिका को खारिज कर उसकी मौत की सजा पर मुहर लगा दी।
--25 मई, 2011: तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भुल्लर की दया याचिका खारिज कर दी।
--26 जून, 2011: भुल्लर की बीवी ने उसकी फांसी की सजा माफ कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई। उसने दलील दी कि उसके पति की दिमागी हालत ठीक नहीं है, ऐसे में उसे फांसी पर नहीं लटकाया जाना चाहिए।
भुल्लर की पत्नी ने शीर्ष अदालत से फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील करने की गुजारिश की। अपनी नई रिट याचिका में नवनीत कौर ने कहा कि दया याचिका में 5700 दिनों की देरी की वजह से उसके पति भुल्लर की मानसिक दशा खराब हो गई।
--12 अप्रैल, 2013: सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की दया याचिका खारिज की, फांसी का रास्ता साफ।