फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो टीशर्ट ने पकड़वा दिया मेहदी को?

Sun, 14 Dec 2014 01:32 PM IST
अमर उजाला नेटवर्क/नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का ट्विटर अकाउंट भारत से संचालित होने के खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हमारी खुफिया एजेंसियों या पुलिस को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। यह भी कि एक विदेशी मीडिया ‘चैनल-4’ कैसे आरोपी के गिरेबां तक पहुंचा।
विज्ञापन


ब्रिटिश युवाओं पर आईएस के बढ़ते असर से चिंतित चैनल 4 ने तय किया कि वह इसकी जड़ तक जाएगा। हालांकि, मेहदी के अकाउंट की तह तक जाना उतना आसान नहीं था। चैनल ने बगैर नाम लिए उससे संपर्क साधा और आईएस से जुड़ने का झांसा दिया। धीरे-धीरे मेहदी चैनल से अपना राज खोलता चला गया। चैनल के पास न तो उसकी फोटो थी और न ही उसके बारे में कोई जानकारी ही थी।

चैनल ने अपनी जांच में पाया कि वह शमी विटनेस से पहले @ElSaltador के नाम से ट्विटर अकाउंट चलाता था। यह अकाउंट एक ईमेलelsaltador@gmail.com से जुड़ा था। चैनल ने पाया कि उसने गूगल प्लस और फेसबुक पर भी इसी नाम से एक अकाउंट चला रखा था। फेसबुक पेज से उसकी असली पहचान, फोटो और स्थान की जानकारी मिली। मेहदी की जिंदगी पर खतरा न हो, इसलिए चैनल ने पहले उसकी पहचान गुप्त रखी।
विज्ञापन


चैनल ने फेसबुक फोटो लेकर उसे धुंधला कर इंटरव्यू के साथ प्रसारित किया। सिर्फ उसके नाम का पहला शब्द मेहदी ही उल्लेख किया। चैनल ने बताया कि वह बंगलूरू में है और कॉरपोरेट कंपनी में काम करता है। हालांकि इसके बाद तो सारी तस्वीर ही साफ हो गई।
Trending Videos

टी शर्ट की वजह से गिरफ्त में आया मेहदी

आतंकी संगठन आईएस के लिए बंगलूरू में बैठ कर ट्वीट कर रहे मेहदी की खबर चैनल-4 पर दिखाए जाने से बेचैन खुफिया एजेंसियों ने बेहद ही साधारण जांच का तरीका अपना कर आरोपी की गिरफ्तारी की। किसी बड़े सॉफ्टवेयर या विदेशी लिंक की बजाय एजेंसियां फेसबुक पर टी-शर्ट वाली फोटो खंगाल कर महज 14 घंटे में मेहदी तक पहुंची। दिल्ली में जद्दोजहद में लगी एजेंसी की टीम ने चैनल पर चली मेहदी की ‘ब्लर’ फोटो की पहचान की। उस फोटो में मेहदी ने टी-शर्ट पहनी थी और उसी को आधार बना कर धरपकड़ अभियान तेज हुआ।

पीएम की टीम ने अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा था कि कितनी देर में मेहदी की गिरफ्तारी होगी और जांच कहां तक पहुंची? ट्विटर हैंडल के जरिए अमेरिका से जानकारी मांगने का प्रयास असफल होने के बाद अधिकारियों ने फेसबुक पर टी-शर्ट वाले व्यक्ति की फोटो खोजनी शुरू कर दी। आईपी एड्रेस ट्रैक करने के बजाए अधिकारियों ने सैकड़ों फेसबुक पेज खोजने के बाद कुछ लोगों को अलग श्रेणी में रखा, जिनकी टी-शर्ट में फोटो थी और जिनके नाम में अगल-बगल मेहदी जुड़ा था। फिर जल्द ही उन लोगों का फोन नंबर निकाला गया।

इसी दौरान जांच एजेंसियों को बंगाली लहजे में अंग्रेजी बोलने वाले लड़के की पहचान हुई, जो ना केवल बंगलूरू में था बल्कि जिसकी कॉल डिटेल अन्य फाइनल लिस्ट में रखे गए लोगों से अलग थी। फिर क्या था उसकी पहचान के लिए अधिकारियों ने कोलकाता के गुरु नानक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी फोन किया और मेहदी की पूरी कुंडली निकाल ली। जब रात 11 बजे पुलिस मेहदी को गिरफ्तार करने उसके एक कमरे वाले घर पर पहुंची तो उस वक्त वह अपने कंप्यूटर पर काम कर रहा था।
विज्ञापन

आईएस का ट्विटर अकाउंट चलाने वाला गिरफ्तार

भारत में बैठकर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के लिए ट्वीट करने वाले शख्स मेहदी मसरूर बिस्वास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने आईएस से जुड़े होने और उसका ट्विटर अकाउंट चलाने की बात कबूल कर ली है। मेहदी पर आईटी अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

कर्नाटक के डीजीपी एल पचाऊ ने बताया कि मूल रूप से पश्चिम बंगाल का निवासी मेहदी मसरूर विस्वास बंगलूरू में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव के रूप में 5.3 लाख के सालाना सैलरी पैकेज पर काम कर रहा था। वह अंग्रेजी बोलने वाले आईएस आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें दुनियाभर की सूचनाएं उपलब्ध कराने का काम करता था। मेहदी ‘शमी विटनेस’ के हैंडल से आईएस के लिए ट्विटर अकाउंट चलाता था, जो आईएस के रंगरूटों को शह देने और उसके लिए नई भर्तियां करने का स्रोत था। बंगलूरू के पुलिस कमिश्नर एमएन रेड्डी ने बताया कि वह कई साल से ‘शमीविटनेस’ के नाम से ट्विटर अकाउंट चला रहा था। हालांकि अभी तक जो खबरें मिली हैं, उसके मुताबिक अभी तक उसने किसी को भी आईएस में भर्ती कराने में अहम भूमिका नहीं निभाई है। वह कभी भी भारत से बाहर नहीं गया है। आरोपी के पास दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया गया है।

पचाऊ ने बताया कि वह सोशल मीडिया पर एशियाई शक्तियों के खिलाफ आईएस के प्रोपगंडा को बढ़ावा देता था। इसके साथ ही वह अपनी पहचान छिपाने को लेकर भी सतर्क था, उसे पूरा विश्वास था कि उसकी पहचान कभी उजागर नहीं हो सकती। पश्चिम बंगाल का मूल निवासी मेहदी की दो बड़ी बहनें हैं और उसके पिता पश्चिम बंगाल राज्य बिजली बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।

दिन में ऑफिस तो रात में ट्विटर अकाउंट पर
पुलिस के मुताबिक वह कई साल से ‘शमीविटनेस’ के नाम से ट्विटर अकाउंट चला रहा था। वह दिन में बहुराष्ट्रीय कंपनी के ऑफिस में काम करता था और रात में आईएस के ट्विटर अकाउंट पर सक्रिय रहता था।

2003 में आतंकियों के संपर्क में आया
पुलिस के मुताबिक इंजीनियरिंग करने बाद उसने 2008 से काम करना शुरू किया। वह 2003 में आतंकी गतिविधियों के संपर्क में आया था। कर्नाटक के डीजीपी एल पचाऊ ने बताया कि मेहदी के दिए बयान के मुताबिक उसने 60 जीबी प्रति माह का इंटरनेट कनेक्शन ले रखा था। वेबसाइट पर वह आईएस से जुड़ी खबरों को तलाशता था, जिसके बाद वह दुनियाभर में इन सूचनाओं को प्रेषित करता था।

मेहदी के पिता ने कहा, बेटे के आईएस से संबंध पर विश्वास नहीं
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के ट्विटर अकाउंट को कथित तौर पर चलाने वाले व्यक्ति मेहदी मसरूर बिस्वास के पिता को इस बात पर विश्वास नहीं है कि उनका बेटा आतंकियों के लिए काम कर रहा है। मेहदी के पिता एम बिस्वास ने कहा, ‘मेरे बेटे का कहना है कि उसे नहीं पता कि यह सब क्या हो रहा है। उसका कहना है कि उसका इंटरनेट अकाउंट हैक कर लिया गया है। मुझे इस बात पर कतई विश्वास नहीं है कि उसके बेटे के आईएस से संबंध हैं।’
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें