आईएस ने दावा किया है कि उसने सोडा केन से बम बनाकर रूस के यात्री विमान को जमींदोज कर दिया। दावे की तस्दीक के लिए उसने बुधवार को एक तस्वीर जारी की है। हालांकि इस्लामिक स्टेट की पत्रिका 'दबिक' में छपी तस्वीर पर सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिमी मीडिया का दावा है कि आईएस ने तस्वीर जानबूझकर जारी की है, ताकि उसके बारे में ऐसी राय बन सके की वह ऐसे बम बनाने में सक्षम है। आईएस का दांव उन युवाओं को आकर्षित कर सके, जो उसे लेकर पहले से ही सकारत्मक रुख रखते हैं। इस बात स्वतंत्र सबूत भी नहीं आए हैं कि रूसी विमान को इसी बम से गिराया गया है।
उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर को शर्म-अल-शेख से सेंट पिटर्सबर्ग जा रहा रूसी मेट्रोजेट सिनाई प्रायद्वीप में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। आईएस ने दावा किया उसने विमान को मारा गिराया है। रूस ने शुरुआत में आईएस के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन बाद में उसने माना की विमान का आतंकी कार्रवाई के तहत ही ध्वस्त किया गया।
सोडा केन से बम बनाना संभव है?
सोडा केन से बम बनाना संभव है? न्यूयॉर्क टाइम्स ने यही सवाल बम निरोधकों विशेषज्ञों से पूछा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम से कम आईएस ने जो तस्वीर जारी की है, उसे देखकर बहुत कुछ बताना कठिन है। केन बम की कई हिस्सें तस्वीर में स्पष्ट नहीं है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि, आईएस की तस्वीर में नया कुछ भी नहीं है, एक अनुभवी बम बनाने वाला ऐसे बम आसानी से बना सकता है।
एक खास किस्म की सर्किट, काले टेप और मेनुअल स्विच के जरिए एक केन से कई काम लिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों को कहना है कि केन के साथ जो वायर दिख रहे हैं, उन्हें विस्फोटकों से जोड़ा गया रहा होगा। केन के अंदर इस्तेमाल सर्किट का अधिकांश हिस्सा काले टेप से छिपा हो सकता है, जिसमें छोटी बैटरियों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। बैट्री और सर्किट विस्फोटक कैप से जोड़ दिया गया होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उसे चार्ज किया जा सके। और ऐसी स्थिति में कैप को डेटोनेटर के रूप में इस्तेमाल किया गया होगा।
तो क्या ऐसे बनाया गया रहा होगा बम?
विशेषज्ञों का कहना है कि आईएस की तस्वीर में दिख रहे केन के पेंदे में एक छेद है, जिससे ऐसा लग रहा है कि उसमें विस्फोटक पेस्ट भरा रहा होगा। उनका कहना है कि केन में जो विस्फोटक रहे होंगे, वे द्रव अवस्था में नहीं रहे होंगे और उसमें लगा ब्लेक टेप्ड कंपोनेंट भी वाटरप्रूफ रहा होगा।
हालांकि कई विशेषज्ञों का दावा है कि ऐसा लगता नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे आलेख में कहा गया है कि तस्वीर के जरिए आईएस के बम का विश्लेषण करना संभव नहीं है, विशेषज्ञों की राय है कि एक सोडा केन को ठूंस-ठूंसकर विस्फोटकों से भरा जाए तो वो एक जेटलाइनर को उड़ाने में भी सक्षम है।
फिर भी ऐसी स्थिति में ऐसा विस्फोट नहीं किया जा सकता कि उससे विमान गिराया जा सके। विस्फोट की जगह और उसकी ताकत पर विमान का गिरना बहुत हद तक निर्भर करता है। ये तब भी संभव है कि जब विस्फोट के बाद कई और विध्वंशक कार्रवाइयां की जाएं। आकाश में तेज गति से उड़ रहा जेट ऐसी स्थिति में दो टुकड़ों में टूटकर जमीन पर गिर सकता है।
बम बनाने का ये तरीका भी रहा होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलिट्री के एक हैंडग्रेनेड में जितना विस्फोटक होता है, केन में उससे ज्यादा मात्रा में विस्फोटक भरा जा सकता है। रूस में 2004 में दो जेट दुर्घटनाग्रस्त हुए था, माना जाता है कि उन्हें हैंड ग्रेनेड से गिराया गया था।
विस्फोटकों से भरे केन को हवाई जहाज में किसी स्थान पर रखकर, किसी टाइमर या रिमोट कंट्रोल की सहायता से उड़ाया जा सकता है। जहाज में बैठा कोई आतंकी ये काम आसानी से कर सकता है।
बम निरोधक दस्ते के एक विशेषज्ञ का कहना है कि केन के साथ दिख रहे लंबे तार से ऐसा लगता है कि वो एक रेडियो एक्टिवेटड बम रहा होगा। और तार का इस्तेमाल एंटिना के रूप में किया गया रहा होगा।
विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि केन एक साधारण बम भी हो सकता है, जिसके लिए न बम को प्लेन में ले जाने की जरूरत हो सकती है और न आतंकी को।