उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को पद छोड़ने के लिए गृह सचिव अनिल गोस्वामी का 5 अगस्त को दूसरी बार किया गया फोन एनडीए सरकार के लिए फजीहत का सबब बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में राज्यपाल कुरैशी ने सवाल खड़ा किया है कि गोस्वामी आखिर किसके कहने पर असंवैधानिक तरीके से इस्तीफे के लिए उन्हें दूसरी बार फोन कर रहे थे।
जबकि 5 अगस्त के उस फोन के चार दिन पहले ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यपाल को चिट्ठी लिख कर आश्वस्त कर दिया था कि मंत्रालय उनकी ओर से दी गई जानकारी पर विचार कर रहा है।
सरकार अब इस पेचीदे सवाल का जवाब तैयार कर रही है, ताकि उसे छह हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सके।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आधिकारिक तौर पर यह बयान देकर इस मामले से पल्ला झाड़ लिया है कि उनकी तरफ से राज्यपाल पर किसी तरह का कोई दबाव डाला गया है।
गोस्वामी ने 30 जुलाई को पहला फोन किया था
याचिका में तारीख और घटनाक्रम के साथ सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि गोस्वामी ने पहली बार 30 जुलाई को राज्यपाल कुरैशी को फोन कर कहा था कि महिलाओं के साथ दुष्कर्म पर उनके दिए गए बयान के चलते वह इस्तीफा दे दें।
इतना ही नहीं गोस्वामी ने यह भी कहा कि अगर वह इस निर्देश का पालन नहीं करते तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।
याचिका के मुताबिक कुरैशी ने गोस्वामी के फोन के आधार पर 2 अगस्त को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बंद लिफाफे में अपने दुष्कर्म संबंधी बयान की सफाई अपने हाथों से सौंपी।
साथ ही इसकी पूरी जानकारी गृहमंत्री राजनाथ सिंह को देते हुए उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश करने के लिए मीडिया को दोषी ठहराया।
2 अगस्त की इस मुलाकात के बाद राजनाथ ने उन्हें खत लिखकर जानकारी दी कि उनकी दी गई जानकारियों पर मंत्रालय गौर कर रहा है।
राज्यपाल ने खड़े किए सवाल
याचिका के मुताबिक इसके बावजूद 5 तारीख को गोस्वामी ने एक बार फिर राज्यपाल कुरैशी को फोन मिलाकर पद छोड़ने के लिए कहा। रिट के मुताबिक इस बार दुष्कर्म वाले बयान की चर्चा नहीं की गई।
गोस्वामी ने पहले फोन की तर्ज पर यह भी दोहराया कि अगर वह निर्देश का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि कुरैशी ने 21 जुलाई को उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक राज्यपाल होने के नाते बयान दिया था कि पूरी पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया जाए तब भी राज्य में बलात्कार की घटनाएं नहीं रुक सकती।
राज्यपाल ने यही सवाल खड़ा किया है कि गृहमंत्री के आश्वासन के बावजूद गृहसचिव किसके कहने से राज्यपाल को असंवैधानिक तरीके से फोन कर रहे थे। राज्यपाल ने केंद्र सरकार, गृह सचिव और उत्तराखंड सरकार से इस पर जवाब मांगा है।