पतंजलि योग पीठ के आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि स्वाइन फ्लू के इलाज में आयुर्वेदिक औषधियां प्रभावी हैं और काफी लाभकारी साबित होती हैं।
अमर उजाला से हुई बातचीत में उन्होंने इसके लिए तैयार किए गए घरेलू आयुर्वेदिक फार्मूले के बारे में भी जानकारी दी. उनका कहना है कि सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण भी मिलते-जुलते होते हैं, इसके चलते लोग सामान्य बुखार को लेकर भी स्वाइन फ्लू के भ्रम में रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में जरूरी है इस बीमारी के सही लक्षण और उसके उपचार की जानकारी लोगों को हो।
उल्लेखनीय है कि देशभर में अब तक स्वाइन फ्लू से 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही 10 हजार से ज्यादा लोग इससे पीड़ित हैं। बालकृष्ण के अनुसार, "स्वाइन फ्लू से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, लोगों को इसके प्रति जागरुक होना चाहिए तभी इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।"
उन्होंने कहा, "लैब में वायरस के प्रोटीन कोड को टेस्ट करने पर पता लगा कि नीम, तुलसी, गिलोय, लौंग और दालचीनी जैसी घरेलू आयुर्वेदिक औषधियां स्वाइन फ्लू में काफी लाभकारी हैं।"
बालकृष्ण से आयुर्वेदिक दवा के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, "हमने इसका एक फार्मूला बनाया है, जिसमें नीम 100 ग्राम, गिलोय 100 ग्राम और दालचीनी व तुलसी को 50-50 ग्राम तथा लौंग 25 ग्राम की मात्रा को एक साथ ले लें। इसे 400 मिलीलीटर पानी में उबाले और 100 मिलीलीटर तक हो जाने पर छान कर मरीज को पिलाएं।
यह दवाई दिन में दो बार पिलानी चाहिए। इसके अलावा आयुर्वेदिक औषधियों में गिलोय घनवटी और ज्वरनाशक काढ़ा भी स्वाइन फ्लू के मरीज के लिए लाभदायक है।"
उन्होंने कहा कि जो लोग स्वाइन फ्लू के मरीजों के करीब रहते हैं या सामान्य स्थितियों में भी इस बीमारी से बचाव करना चाहते हैं उन्हें नियिमित योगासन और प्राणायाम करना चाहिए और साथ में च्यवनप्राश तथा अश्वगंधा पाउडर दूध के साथ लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि इसके अलावा दूध मुनक्का, छुहारा, खजूर और किशमिश का भी नियमित सेवन करते रहें। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।