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गृह मंत्रालय ने खारिज की कसाब की दया याचिका

Wed, 24 Oct 2012 12:12 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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गृह मंत्रालय ने 26/11 के मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब की क्षमा याचिका को खारिज करते हुए उसे वापस राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेज दिया है। अब राष्ट्रपति को अंतिम फैसला लेना है कि कसाब की फांसी की सजा माफ कर दी जाए या नहीं।
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क्षमा याचिका पर राय देने के मामले में महीनों का वक्त लगाने वाले गृह मंत्रालय ने कसाब के मामले में तीन हफ्ते की भीतर ही फैसला ले लिया। महाराष्ट्र के गवर्नर के. शंकरनारायणन पहले ही इस क्षमा याचिका को खारिज कर चुके हैं। गवर्नर के इस फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने अपनी राय देने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया।

गौरतलब है कि 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की ओर से कसाब की फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले के बाद ही गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बयान दिया था कि कसाब की सजा पर जल्द से जल्द अमल किया जाएगा।
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दरअसल क्षमा याचिका मिलने के बाद राष्ट्रपति गृह मंत्रालय के जरिए संबंधित राज्य के राय मांगते हैं। कसाब के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने बिना समय गंवाय फांसी की सजा पर अमल करने की राय दे दी। इस राय पर गृह मंत्रालय ने भी अपनी मुहर लगा कर याचिका राष्ट्रपति को वापस भेज दिया है।

गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार चाहती है कि कसाब को जितनी जल्दी हो सके फांसी पर चढ़ा दिया जाए। सूत्र ने बताया कि संविधान की धारा 72 के तहत फांसी की सजा को लेकर कोई समयसीमा तय नहीं है। यह राष्ट्रपति के ऊपर है कि वह कितनी जल्दी याचिका को स्वीकार करते हैं या खारिज कर देते हैं।

पिछले महीने के आरंभ में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब ने राष्ट्रपति को उर्दू में अपनी फांसी की सजा माफ करने की याचिका भेजी थी। 26/11 के मुंबई हमले में शामिल कसाब एकमात्र पाकिस्तानी है, जिसे मुंबई पुलिस जिंदा पकड़ने में कामयाब हो पाई थी।
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