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गडकरी की कंपनियों में गोलमाल, केंद्र कराएगा जांच

Wed, 24 Oct 2012 12:02 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर भ्रष्टाचार के नए आरोपों को लेकर सियासत गरमा गई है। उनकी कंपनियों की फंडिंग में घपले की खबर को लेकर कॉरपोरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने जांच कराने की बात कही है। कांग्रेस से लेकर लेफ्ट ने भी भाजपा से उसके अध्यक्ष पर उठते सवालों का जवाब मांगा है।
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कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तो सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर गडकरी पर लगे आरोपों की जांच की मांग कर दी है। गडकरी ने भले ही इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन दिसंबर में उनके फिर से भाजपा अध्यक्ष बनने की उम्मीदों पर फिलहाल संकट के बादल घिरते दिख रहे हैं।  

गडकरी पर महाराष्ट्र में पीडब्लूडी मंत्री रहते हुए खुद की कंपनियों को आर्थिक फायदा पहुंचाने का नया आरोप सामने आया है। वह महाराष्ट्र की शिवसेना-भाजपा की तत्कालीन सरकार में 1995 से 1999 तक मंत्री थे। गडकरी की कंपनियों की अनियमितताओं की खबर को लेकर भाजपा भी सवालों के घेरे में फंस गई है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार भाजपा के हमले झेल रही सरकार ने भी मामले की जांच की बात कह दी है।
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मोइली ने कहा कि उन्होंने असलियत का पता लगाने के लिए ठोस पड़ताल के आदेश दिए हैं कि क्या हकीकत में कंपनी कानून का कोई उल्लंघन तो नहीं हुआ है। सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी और संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने भी गडकरी पर लगे आरोपों को संगीन बताते हुए भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप जड़ दिया। हालांकि सरकार राबर्ट वाड्रा के व्यापारिक सौदों की जांच को लेकर मौन है। मोइली ने गडकरी और वाड्रा के मसले को अलग अलग बताया है।

उधर, दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा है कि गडकरी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता दिख रहा है। इस मामले की जांच करवाई जानी चाहिए। दिग्विजय ने कहा कि गडकरी की कंपनियों को कौन वित्त पोषण करता था। इसका पता चलना चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा से जवाब मांगते हुए तंज कसा है कि इससे पहले भी इनके अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण घूस खाने के मामले में दोषी करार दिए जा चूके हैं।

क्या हैं आरोप
गडकरी की कंपनी पूर्ति पावर एंड शुगर लिमिटेड के धन के स्रोत पर सवाल खड़े किए गए हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पूर्ति के अधिकतर निवेश और कर्ज निर्माण कंपनी आइडियल रोड बिल्डर्स यानी आईआरबी समूह की ओर से दिए गए। खबरों में कहा गया है कि गडकरी जब 1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र सरकार में पीडब्लूडी मंत्री थे, उस समय आईआरबी समूह को कई ठेके मिले थे। इसके अलावा पूर्ति के सभी शेयर धारक कंपनियों के पते भी फर्जी हैं। इनमें से पांच कंपनियों के पते दरअसल मुंबई की झुग्गी बस्तियों के हैं।

यह गंभीर प्रकृति के आरोप हैं। विपक्षी दल और उसके नेतृत्व को इस बारे में सफाई देनी चाहिए। इससे पहले भी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को रिश्वत के मामले में अदालत दोषी करार दे चुकी है।
राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता  

महाराष्ट्र सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की बात बेबुनियाद है। मैं खुद पर लगे इन आरोपों की किसी भी जांच के लिए तैयार हूं।
नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष

भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस दोहरी नीति अपना रही है। कांग्रेस गडकरी की कंपनी की जांच की बात तो करती है, लेकिन रॉबर्ट वाड्रा और वीरभद्र सिंह पर लगे आरोपों की लीपापोती में लगी है।
निर्मला सीतारमण, भाजपा

गडकरी को खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर दूसरी बार भाजपा के अध्यक्ष पद पर काबिज नहीं होना चाहिए। अगले चुनाव हम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ेंगे यदि गडकरी फिर अध्यक्ष बने तो पार्टी की स्थिति कमजोर होगी। मुझे राजनीति में कारोबारी के आने से कोई ऐतराज नहीं है। मगर राजनीति को कारोबार बनाने पर सख्त ऐतराज है।
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राम जेठमलानी, भाजपा सांसद और वकील

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