नफरत की दीवार को दरकिनार कर पीरखेड़ा गांव सांप्रदायिक सौहार्द के माहौल को बरकरार रखकर एक मिसाल पेश की है। इस गांव के चौधरी साहब और इस्लाम मियां एक साथ ही हुक्का गुड़गुड़ाते हुए नजर आए।
इन लोगों ने कहा कि नफरत की आग में इंसान का ही नुकसान होता है। जिला मुख्यालय से करीब 14 किमी दूर झिंझाना क्षेत्र के पीरखेड़ा गांव के सांप्रदायिक सौहार्द के चर्चे अक्सर लोग करते हैं।
अमर उजाला टीम इस गांव में पहुंची, तो गांव में घुसते ही मीरहसन के घर के बाहर एक चारपाई पर दोनों समुदाय के राजपाल, मौजुददीन, जितेंद्र, मौ.बिलाल बैठे आपस में वार्ता कर रहे थे।
इसी बीच यहां से पंडित प्रवीण कुमार सड़क से गुजरे, तो मौजुद्दीन ने उन्हें देख बोला पंडित जी को राम-राम। पंडित जी ने राम राम ली और आगे चलने लगे, तो यहां बैठे मास्टर हाजी नसरूद्दीन ने उन्हें बैठने को कहा।
पंडित जी भी यहां बैठकर बातचीत करने लगे टीम कुछ और आगे चली, तो गांव के मंदिर के सामने एक घेर में चौधरी अनिल और इस्लाम मियां एक चारपाई पर बैठे हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। पूछने पर बोले कि यहां तो हर गली में हिंदू और मुस्लिम एक साथ हुक्का गुड़गुड़ाते हैं।
ग्राम प्रधान के घेर के नजदीक दोनों समुदाय के लोग बैठे आपस में बातचीत में मशगूल थे। गांव के कई युवा भी यहां थे। यहां का माहौल देख ऐसा लगा ही नहीं कि यहां किसी तरह की कोई टेंशन हो।
ग्राम प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि इस गांव की करीब तीन हजार की आबादी में मुस्लिमों की संख्या मुश्किल से 400 है, लेकिन कभी भी मुस्लिमों ने खुद को अलग महसूस नहीं किया।
चार दिन पहले जब हिंसा की शुरूआत हुई, तो शाम को ही हिंदू समाज के लोगों ने पंचायत कर इसमें मुस्लिम समाज के लोगों को बुलाकर सुरक्षा का भरोसा दिया।
नतीजा रहा कि गांव से किसी भी मुस्लिम परिवार का पलायन नहीं हुआ। गांव में इसरार का परिवार बाहर गया है। इसरार का खाना गांव के अरुण कुमार उर्फ पिंटू के यहां बन रहा है।
अरुण कुमार और प्रदीप ने बताया कि गांव में प्रधान जयवीर और सत्तार की इतनी गहरी दोस्ती है, तो दोनों एकदूसरे के यहां खाना भी खा लेते हैं। उनकी दोस्ती देख लोग सत्तार को भी प्रधान जी कहकर पुकारते हैं।