प्रभादेवी क्षेत्र में बने अनाधिकृत ढांचे के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को लेकर बांबे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई है। बीएमसी का कहना है कि जब तक सिटी पुलिस की अनुमति नहीं मिलती, तब तक वह कार्रवाई नहीं कर सकती।
जस्टिस मृदुला भटकर और एएम खानविल्कर की पीठ ने कहा, ‘हमें यह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर पुलिस की अनुमति के बिना गैर कानूनी निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने से बीएमसी क्यों कतरा रही है। 31 अक्तूबर को सुनाए गए हमारे आदेश में याचिकाकर्ता की शिकायत पर सुनवाई करते हुए हमने कहा था कि निगम के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाया गया था। संभवत: यह एक कारण हो सकता है, जिस वजह से निगम के अधिकारी पुलिस प्रशासन की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। इसका समर्थन नहीं किया जा सकता।’
जज ने कहा कि निगम को सुधारात्मक उपायों के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं और कारण बताओ नोटिस भी सौंपा जा चुका है। उसे जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई और अनाधिकृत ढंाचे को हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए और कब्जा करने वाले व्यक्ति को बाध्य करना चाहिए कि मंजूर प्लान के मुताबिक वास्तविक स्थिति स्थापित करे। उम्मीद है कि उपायुक्त, दक्षिण वार्ड इस मामले को सुलझाने के लिए निजी स्तर पर प्रयास करेंगे। कोर्ट ने 31 अक्तूबर को अपने फैसले में बीएमसी को एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने के लिए कहा था।