हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि अगर वह कांग्रेस शासित राज्यों में प्रतिवर्ष नौ रियायती दर पर सिलेंडर दे रही है तो देश के बाकी राज्यों में छह रियायती दर वाले सिलेंडर ही क्यों दिए जा रहे हैं। न्यायालय ने इस पर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वाराणसी के वकील नित्यानंद चौबे ने जनहित याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार की नई एलपीजी सिलेंडर नीति को चुनौती देते हुए कहा कि केंद्र की नीति भेदभावपूर्ण है।
बुधवार को याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता शशिशंकर त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार ने नई नीति के तहत एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब एक परिवार को एक कनेक्शन पर साल भर में छह रियायती दर वाले सिलेंडर ही दिए जाएंगे।
इनकी कीमत 406 रुपये प्रति सिलेंडर है। इससे अधिक सिलेंडर लेने पर उपभोक्ता को 795 रुपये या उससे अधिक देना होगा। इसी प्रकार से एक परिवार को एक से अधिक कनेक्शन रखने की इजाजत नहीं होगी। यदि कोई संयुक्त परिवार है, जिसमें सदस्यों की संख्या अधिक है तो उसके लिए मुश्किल होगी।
इसी प्रकार से सरकार ने केंद्र शासित (कांग्रेसी राज्यों) को प्रतिवर्ष नौ रियायती रद के सिलेंडर देने की घोषणा की है, जबकि अन्य राज्यों को छह सिलेंडर ही दिए जा रहे हैं। सरकार की यह भी योजना है कि अगले चरण में रियायती दर वाले सिलेंडर मात्र बीपीएल कार्ड धारकों को ही दिए जाएंगे।
सामान्य वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए 800 से 1400 रुपये प्रति सिलेंडर की दर तय की गई है। केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।