मनी लांड्रिंग और विदेशों में काला धन जमा करने के आरोपों का सामना कर रहे पुणे के व्यवसायी हसन अली खान की जमानत याचिका बांबे हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
हसन ने अपनी अर्जी में कहा था कि मनी लांड्रिंग मामले में अभी तक उसके खिलाफ आरोप पत्र दायर नहीं किए गए हैं, इसलिए उसे जमानत दे दी जाए। जबकि, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तर्क दिया था कि अगर हसन को जमानत दे दी गई, तो वह फरार हो सकता है या फिर सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है।
बुधवार को ईडी की दलील सुनकर न्यायाधीश आरसी चह्वाण ने हसन की अर्जी खारिज कर दी। यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड में आठ अरब डॉलर (4,3828 करोड़ रुपये) जमा करने के आरोपी हसन को 2011 में गिरफ्तार किया गया था और उसी साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
खान पर विभिन्न नामों से पांच पासपोर्ट रखने और स्विस बैंकों में भारी लेन-देन करने के आरोप हैं। हथियारों के अंतरराष्ट्रीय सौदागर अदनान खशोगी के साथ मनी लांड्रिंग के संदेह में हसन के आतंकी संबंधों पर भी नजर रखी जा रही है।