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हाईकोर्ट का सेक्स संबंधी विज्ञापनों के प्रकाशन पर रोक

Thu, 01 Nov 2012 10:55 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेक्स के नाम पर की जा रही धोखाधड़ी पर गंभीर रुख अपनाते हुए सेक्स संबंधी विज्ञापनों के प्रकाशन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। प्रदेश सरकार से कहा है सेक्स संबंधी समस्याओं के निदान का दावा करने वाले पोस्टर, होर्डिंग तथा दवाओं के विज्ञापन पर भी रोक लगाई जाए।
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अवैध रूप से चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण केंद्रों पर भी नकेल कसते हुए अदालत ने साफ किया है कि यदि किसी जिले से ऐसी शिकायत आती है तो वहां के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को एक मॉनिटरिंग सेल बनाने का निर्देश दिया है, जो झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की निगरानी करेगी।

डीएम, सीएमओ के खिलाफ दर्ज होंगे मुकदमे
याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में डायग्नोस्टिक सेंटर, पैथालॉजी लैब और अल्ट्रासाउंड केंद्रों में अवैध तरीके से भ्रूण लिंग परीक्षण की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने जिलाधिकारी और सीएमओ की सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि यदि उनके अधिकारक्षेत्र में इस प्रकार के अवैध केंद्र चलते पाए गए तो डीएम और सीएमओ के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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अखबारों के खिलाफ होगी शिकायत
इसी प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाले सेक्स संबंधी विज्ञापनों पर अदालत ने कहा कि डॉक्टरों और वकीलों को व्यवसायिक विज्ञापन देने का अधिकार नहीं है। यदि कोई अखबार ऐसे विज्ञापन छापते हैं तो उनकी शिकायत प्रेस काउंसिल से की जाए। कोर्ट ने झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। आगरा में झोला छाप डाक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में प्रमुख सचिव गृह ने अवगत कराया कि अब तक 91 झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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