संसद की स्थायी समिति ने बलात्कार के जघन्य मामलों और दूसरी बार यह घृणित गुनाह करने के दोषियों के लिए फांसी की सजा की सिफारिश की है। साथ ही समिति ने नाबालिग की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल करने के विवादित मामले को भी फिलहाल टाल दिया है।
गृह मंत्रालय की स्थायी समिति ने दंड विधि (संशोधन) विधेयक 2012 पर अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को राज्यसभा में पेश कर दी। समिति के अध्यक्ष और भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि बलात्कार के 54 फीसदी मामलों में वहीं लोग शामिल होते हैं जिन्होंने पहले भी यह अपराध किया है। यही वजह है कि जघन्य मामलों के साथ दो बार दोषी ठहराए गए लोगों के लिए भी फांसी की सजा की सिफारिश की गई है।
समिति ने महिला के खिलाफ हुए अपराध पर कोताही बरतने वाले अधिकारियों के लिए कड़ी सजा का प्रस्ताव भी किया है। समिति ने यह भी कहा है कि ऐसे अधिकारियों के लिए जमानत का प्रावधान भी नहीं होना चाहिए। दिल्ली में युवती के खिलाफ हुए दरिंदगी की घटना के बाद नाबालिग की उम्र सीमा कम करने की मांग पर गरमाए इस मामले पर नायडू की समिति ने कोई सिफारिश नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर समिति में चर्चा तो हुई लेकिन मतभेद होने के कारण इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। महिलाओं के खिलाफ अपराध कानून को मजबूत और कारगर बनाने वाला अपराध कानून संशोधन बिल लोकसभा में पेश हो चुका है। स्थायी समिति की इन सिफारिशों के बाद इसे इसी सत्र में राज्यसभा में पेश किया जाना है।