सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को समर्पण करने के लिए चार सप्ताह का और वक्त दिया है। हालांकि उन्होंने 6 महीने का वक्त मांगा था।
संजय दत्त को वर्ष 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में गैरकानूनी शस्त्र रखने के जुर्म में दोषी करार दिए गया है। 21 मार्च को उन्हें इस मामले में 5 साल की सजा सुनाई गई थी।
उन्हें शुक्रवार को समर्पण करना था लेकिन अब वह 16 मई को समर्पण करेंगे।
53 वर्षीय बॉलीवुड अभिनेता ने आत्मसमर्पण की अवधि को छह माह बढ़ाने की मांग अपनी अधूरी फिल्मों को पूरी करने के लिए की थी।
हालांकि सर्वोच्च अदालत ने संजय दत्त को ये कहते हुए 6 माह की मोहलत देने से इनकार कर दिया कि वे एक माह से अधिक की मोहलत नहीं दे सकते।
कोर्ट ने संजय दत्त को पारिवारिक और आर्थिक कारणों से राहत दी है और अपने फैसले में कहा है कि इससे अधिक राहत उन्हें नहीं दी जा सकती।
मंगलवार को होनी थी सुनवाई
संजय दत्त की याचिका पर सुनवाई मंगलवार को होनी थी। जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सिने स्टार की याचिका अतिशीघ्र सुनवाई के लिए लगी थी लेकिन मुंबई ब्लास्ट मामले में फैसला देने वाले जस्टिस सदाशिवम् के साथी न्यायाधीश बीएस चौहान मौजूद नहीं थे।
ऐसे में पीठ ने सुनवाई को अगले दिन के लिए टाल दिया।
बॉलीवुड स्टार ने सर्वोच्च अदालत में दाखिल की गई याचिका में कहा था कि पुलिसगीरी, जंजीर, शेर, उंगली, पीके, वसूली, द्वंद्व फिल्में अभी पूरी नहीं हुई हैं।
इसके मुताबिक इन फिल्मों पर 278 करोड़ रुपये लगे हुए हैं जिनके पूरा न होने की स्थिति में सिर्फ आवेदक को ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों को भारी नुकसान होगा।
संजय दत्त ने कहा था कि सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद से उन्होंने कोई नई फिल्म साइन नहीं की है। लेकिन अधूरी फिल्मों को पूरा करने के लिए उन्हें 196 दिन का समय चाहिए।