राजधानी में 16 दिसंबर की रात एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद रायसीना हिल्स और इंडिया गेट पर छात्रों के जबर्दस्त प्रदर्शन के बाद सरकार ने पीड़ित के मामले की सुनवाई तीन जनवरी से फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का फैसला किया है।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आज दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दरमार मुगसन से मुलाकात करके 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के मामले की शीघ्र सुनवाई करने की प्रक्रिया शुरु करने के संबंध में बातचीत की।
मुगसन ने शिंदे और दीक्षित को बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर तीन जनवरी से छह अभियुक्तों के खिलाफ इस मुकदमे की सुनवाई शुरु कर दी जाएगी।
गौररतलब है कि 16 दिसंबर की रात एक चलती बस में इस छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद देशभर में यह मांग उठने लगी कि बलात्कार के मामलों की सुनवाई त्वरित अदालत में हो और पीडितों को जल्द से जल्द न्याय दिलाया जाए।
कानून में बदलाव के लिए आयोग गठित
दुष्कर्म से जुडे़ कानून को और सख्त बनाने के लिए इसमें बदलाव करने पर सुझाव देने के वास्ते पूर्व न्यायाधीश जे एस वर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन कर दिया गया है।
सुशील कुमार शिंदे ने बताया कि पूर्व न्यायाधीश लीला सेठ और पूर्व सोलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रहमण्यम आयोग के अन्य सदस्य हैं। यह आयोग 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।