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बंद कमरे में होगी गैंगरेप मामले की सुनवाई

Tue, 08 Jan 2013 01:09 AM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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चलती बस में गैंगरेप के मामले की सुनवाई बंद कमरे में होगी। सोमवार को कोर्ट रूम के अंदर वकीलों के हंगामे के बाद अदालत ने यह निर्णय लिया। अदालत ने इस मामले में अदालती कार्यवाही के बारे में खबरों के प्रकाशन और प्रसारण पर भी रोक लगा दी है। वहीं, गैंगरेप मामले के मुख्य आरोपी राम सिंह सहित पांच आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को आरोपपत्र व उससे जुड़े दस्तावेज सौंप दिए। इसके अलावा सभी अभियुक्तों को खुद वकील करने या सरकार की ओर से वकील लेने की स्वतंत्रता दे दी। मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी।
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साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल के समक्ष आरोपी राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा (20), पवन (19) और अक्षय ठाकुर को दोपहर करीब 2:45 बजे कड़ी सुरक्षा में पेश किया गया। सुनवाई से पहले अदालत परिसर आम लोगों, वकीलों और मीडियाकर्मियों से इस कदर भर गया था कि अदालती कार्यवाही में बाधा पहुंचने लगी। इस दौरान अदालत में जमकर हंगामा भी हुआ, जिसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने का निर्णय लिया।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने कहा कि अदालत का पूरा कमरा वकीलों व आम लोगों से पैक है। वे बाधा पैदा कर रहे हैं और कमरे में एक इंच भी जगह खाली नहीं है। ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनका मामले से कोई लेना देना नहीं है। इन लोगों से कई बार बाहर इंतजार करने का आग्रह किया गया, मगर उन पर कोई असर नहीं पड़ा। कोई सुनने को तैयार नहीं है। यहां तक कि ये लोग रीडर और स्टेनो की सीट तक पहुंच गए। उन्होंने कहा कि लॉकअप इंचार्ज ने भी बताया कि अभियुक्त तिहाड़ से आ चुके हैं, मगर सुरक्षा की दृष्टि से इस माहौल में उन्हें अदालत में पेश करना संभव नहीं है।
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मजिस्ट्रेट ने कहा कि हंगामे के कारण कोर्ट की कार्यवाही जारी रखना संभव नहीं है। इसलिए सीआरपीसी की धारा 327 (2) व (3) को लागू करते हुए सभी को तुरंत अदालत खाली करने का निर्देश दिया जाता है। अब मामले की सुनवाई बंद कमरे में होगी। मीडिया पर पाबंदी लगाते हुए उन्होंने कहा कि अदालत इस मामले से जुड़ी खबरों के प्रकाशन-प्रसारण पर भी रोक लगाती है। कोर्ट की अनुमति के बिना इस बारे में किसी खबर का प्रकाशन या प्रसारण गैरकानूनी होगा।

मीडिया पर पाबंदी को चुनौती
कुछ वकीलों ने मामले की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया पर लगाई गई पाबंदी को अदालत में चुनौती दी है। इस संबंध में जिला जज आरके गौबा की कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन पर अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए 9 जनवरी को सुनवाई तय की है।

सीआरपीएफ बुलानी पड़ी
सुनवाई से पहले अदालत में खूब हंगामा हुआ। सोमवार को अभियुक्तों की ओर से पेश होने की पेशकश करने वाले वकील का अन्य वकीलों ने जमकर विरोध किया। मारपीट की नौबत तक आ गई। हंगामे को देखते हुए सीआरपीएफ के महिला दस्ते को अदालत में बुलवाना पड़ा।

नाबालिग की आयु तय नहीं
नाबालिग आरोपी की आयु पर सोमवार को कोई फैसला नहीं हो सका। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में होगी। नाबालिग आरोपी को सोमवार को जेजे बोर्ड के सामने पेश किया गया। आयु तय करने के लिए उसके स्कूल का रिकॉर्ड मंगाया गया था, लेकिन जरूरी दस्तावेज न होने पर प्रिंसिपल को और रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा गया।

फास्ट ट्रैक कोर्ट बनें: चीफ जस्टिस
चलती बस में गैंगरेप की घटना को पूरे देश को झकझोर देने वाला वाकया बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ने कहा है कि मुकदमों के निपटारे में देरी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी का बड़ा कारण है। उन्होंने देश के सभी 21 हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों के तेजी से निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन करने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमने इन मुकदमों को शीघ्र नहीं निपटाया तो हम अपने दायित्व का निर्वाह करने में असफल होंगे।
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