पटेल बिरादरी को ओबीसी में शामिल कर आरक्षण की मांग से भडकी आग की लपटें भविष्य में और तेज हो सकती हैं। दरअसल पटेल आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल की योजना अपने आंदोलन को गति देने के लिए उन जाति के नेताओं के संपर्क में हैं, जो अरसे से आरक्षण की मांग कर रही हैं।
इस क्रम में फिलहाल उनकी एसटी में शामिल करने की मांग कर रहे गुर्जर नेताओं के साथ गंभीर बातचीत चल रही है, जबकि जाट नेताओं के साथ भी बातचीत हो रही है। पहले से ही मराठा (रोड), जाट पटेल और जाट के लिए आंदोलन चला रहे जाट आरक्षण संघर्ष समिति का रुख खासतौर से पटेल आंदोलन के साथ जाने के मामले में सकारात्मक है।
समिति के गुजरात इकाई के प्रमुख एनडी चौधरी फिलहाल पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के संपर्क में हैं। जबकि गुर्जर आंदोलन के अगुआ रहे किरोडी सिंह बैसला अरसे से हार्दिक के संपर्क में हैं।
मिलकर करेंगे रैली
इनकी योजना मिलजुल कर दिल्ली में बडी रैली करने की है। हालांकि इससे पहले
जाट आरक्षण संघर्ष समिति हिसार में 13 सितंबर को रैली करने जा रही है। इस
रैली में रोड और जाट पटेल शिरकत करने वाले हैं।
गुजरात में पटेल आरक्षण
आंदोलन से पहले से ही चिंतित केंद्र की चिंता हार्दिक की नई रणनीति और
आरक्षण मांगने वाली जातियों की संभावित गोलबंदी से और बढ गई है। खासतौर पर
उसे अंदेशा है कि इस नई रणनीति के कारण शांत पडा गुर्जर आंदोलन की गूंज
अचानक नए सिरे से सुनाई पड सकती है तो जाटों के तेवर और आक्रामक हो सकते
हैं।
उल्लेखनीय है कि अपनी रणनीति को धार देने के लिए हार्दिक शुक्रवार को
दिल्ली आने वाले थे। मगर अब कहा जा रहा है कि दिल्ली में दस्तक देने से
पहले हार्दिक गुजरात में रह कर ही आरक्षण की मांग करने वाली जातियों
केनेताओं के साथ बातचीत कर रणनीति तैयार करेंगे।
बैंसला दे चुके हैं समर्थन
जाट संघर्ष समिति
के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि समिति के गुजरात
इकाई के अध्यक्ष चौधरी पाटीदार अनामत आंदोलन पर निगाह रख रहे हैं। उन्होंने
कहा कि गुर्जर हालांकि खुद को एसटी में शामिल कराने की लडाई लड रहे हैं
मगर जाट की तरह पटेल भी खुद को ओबीसी श्रेणी में शामिल करना चाहते हैं।
इसलिए हम हालात पर परिस्थितियों पर निगाह रख रहे हैं। हालांकि 13 को हिसार
में होने वाली रैली में जाट पटेल भी शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि
हालांकि उनकी अभी एक साथ आंदोलन के सवाल पर हार्दिक से बातचीत नहीं हुई है,
मगर समिति की राज्य इकाई जरूर पटेल आंदोलन के संपर्क में है।
दूसरी ओर
बैसला पहले ही पटेल आंदोलन को अपना समर्थन दे चुके हैं। जाहिर है कि
पटेल आंदोलन की तपिश झेल रही सरकार के सामने इस संभावित नई परिस्थितियों ने
बडी चुनौती खडी कर दी है।
सरकार की चिंता है कि अगर जातियों के बीच आरक्षण
के सवाल पर सफल गोलबंदी हुआ तो उसे निकट भविष्य में जाट आरक्षण और गुर्जर
आरक्षण की नए सिरे से तपिश झेलनी पड सकती है।