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क्या सियाचिन में योग ने बचाई हनुमंथप्पा की जान?

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लांस नायक हनुमनथप्पा को 35 फीट मोटी बर्फ के नीचे से निकाला गया तो उनकी नाड़ी चल रही थी। -45 डिग्री सेल्सियस तापमान में वह पांच दिनों तक बर्फ के नीचे दबे रहे। समंदर से 19,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर पर तीन फरवरी को आए बर्फीले तूफान ने हनुमंथप्पा के 9 साथियों की जान लेली।
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हनुमंथप्पा का बचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक, बर्फीले तूफान में 35 मिनट से ज्यादा दबने के हालत में 27 फीसदी व्यक्ति ही जीवित रह पाए, जबकि हनुमंथप्पा पांच दिनों तक बर्फ की मोटी दीवार के नीचे दबे रहे।

अपने जीवट के बल पर वह हाई एल्टिट्यूड पल्मनरी ओडीमा, सेरेब्रल ओडीमा, हाइपोथर्मिया, हाइपोक्सिया जैसे बीमारियों से संघर्ष करते रहे। हनुमंथप्पा रोजना योग किया करते थे। माना जा रहा है कि योग ने जानलेवा हालात में भी उन्हें बचाकर रखा।
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रोजाना योग किया करते थे हनुमंथप्पा

लगभग 13 सालों से सेना में कार्यरत हनुमंथप्पा खुद रोजना योग करते और सांस की कई एक्सरसाइज किया करते। वे अपने साथी सैनिकों को भी योग के लिए उत्साहित करते। मेल टूडे से बातचीत में ये जानकारी 14 कॉर्प्स में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।

उन्होंने बताया कि चिकित्सा ‌विज्ञान ये बेहतर बता पाएगा कि हनुमंथप्पा कैसे बच पाए, हालांकि हमारा मानना है कि योग के कारण ही उनकी जान बच पाई। हालांकि लंबे समय तक माइनस 45 डिग्री सेल्सियस की ठंड में रहने के कारण उनकी किडनी और लीवर पर बुरा असर पड़ा।

उल्लेखनीय है‌ कि तीन फरवरी को आए बर्फीले तूफान में सियाचिन के उत्तरी ग्लेसियर पर बनी 19 मद्रास पोस्ट पर तैनात सभी 10 सैनिक दब गए थे। जवानों की खोजबीन के लिए 200 सदस्यों की बचाव टीम लगाई गई ‌थी, जो अत्याधुनिक उपकरणों से लैस थी।
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