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सियाचीन के 10 जांबाजों के किस्से, हो जाएगा सीना चौड़ा

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सेना के साहस का नया चेहरा बनकर उभरे हनुमंथप्पा की दिलेरी को देश ने देख लिया है। अब उनके साथ सियाचिन ग्लेशियर की सोनम पोस्ट पर तैनात बाकी जवानों के शौर्य की कहानियां भी सामने आ रही हैं। दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में तैनात टीम में ‘रैंबो’ से लेकर ‘ऑल इन वन’ तक थे।
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इन जवानों को मुश्किल हालातों में जाना, जूझना और फिर जीतकर निकलना पसंद था। इसी आदत की वजह से इन 10 जवानों को भारत के सबसे दुर्गम इलाके की रखवाली करने के लिए भेजा गया था।

जूनियर कमिशंड ऑफिसर सूबेदार नागेश टीटी को उनके साथी रैंबो के नाम से याद करते हैं। वह अपने साथ दूसरों के हथियार भी उठा और लोड कर देते थे। रोमांच का चस्का था और इसलिए बेहतरीन ग्रेड के साथ पैरा मोटर कोर्स कर लिया।
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सियाचिन के नायकों के थे खास नाम

22 सालों की नौकरी में 12 साल कठिन हालात वाली जगहों पर रहे। इस दौरान ऑपरेशन पराक्रम और जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक में हिस्सा लिया। तीन साल एनएसजी में रहे और फिर ऑपरेशन राइनो के लिए 2009 से 2012 के बीच पूर्वोत्तर चले गए। हनुमंथप्पा की तरह उन्होंने भी अपनी पसंद से कठिन पोस्ट पर जाना पसंद किया और रैंबो की तरह हर जगह से जीत कर लौटे।

हवलदार ईलुमलाई एम की कहानी भी ऐसी ही है। वह खुद आगे बढ़कर काम हाथ में ले लेते थे और फिर उसे पूरा करके ही मानते। उन्होंने 28 अक्तूबर 1996 में मद्रास रेजीमेंट की 19वीं बटालियन ज्वाइन की थी। उन्होंने नौ साल फील्ड सर्विस की और इस दरम्यान जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में आतंकियों के खिलाफ कई छोटे सफल ऑपरेशन की कमान संभाली। वह आगे बढ़कर नेतृत्व करते थे और इसीलिए उन्हें सोनम पोस्ट जाने वाली टीम का हिस्सा बनाया गया। उन्होंने मद्रास रेजीमेंटल सेंटर में कई प्रशिक्षुओं को ट्रेनिंग भी दी।

इस टीम के अगले नायक हैं लांस नायक सुधेश बी और साथियों की नजर में ऑल इन वन यानी एक व्यक्ति में सारी खूबियां। सुधेश वाकई ऐसे ही थे। उन्होंने ऑपरेशन रक्षक में भाग लिया, खुफिया जानकारी जुटाने वाली टीम में रहे, बटालियन की कई सफलताओं में अहम योगदान दिया और इसके साथ खेल के मैदान में भी धूम मचाते रहे।
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सियाचिन के हीरो

जेसीओ सूबेदार नागेश टीटी - रैंबो, दूसरों के हथियार भी उठाकर ले जाते थे
हवलदार ईलुमलाई एम - कई बार आगे बढ़कर नेतृत्व किया
लांस नायक सुधेश बी - हर खेल खेलने में माहिर यानी हरफनमौला, साथियों की नजर में ऑल इन वन
लांस हवलदार एस कुमार - उन कुछ जवानों में से एक जो दो बार सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात हुए
सिपाही एस मुश्ताक अहमद - अपने साथियों और अधीनस्थों के लिए प्रेरणास्रोत
सिपाही महेश पीएन - 11 साल की नौकरी में अपनी मर्जी से सात साल कठिन हालात वाली जगहों पर रहे
सिपाही राममूर्ति एन - बटालियन को मिलने वाले कठिन काम को खुद करने के लिए हमेशा तैयार
सिपाही गणेशन जी - अपने काम से साथियों में भी विश्वास पैदा कर देते थे, छोटा भाई भी सेना में
सिपाही/नर्सिंग असिस्टेंट सूर्यवंशी एसवी - पिछले साल छह अक्तूबर को ऑपरेशन मेघदूत की कठिन जिम्मेदारी निभाई
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