कुछ राज्यों में तंबाकू पर प्रतिबंध लगने के बाद अब पूरे देश में तंबाकू पर प्रतिबंध लग सकता है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से आदेश पारित करने का आग्रह किया है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तंबाकू के खिलाफ रिपोर्ट पेश करते हुए गुटखे पर प्रतिबंध का समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने तीन अप्रैल को सभी राज्य सरकारों और केन्द्र शासित प्रदेशों से गुटखा उत्पादों पर प्रतिबंध पर अमल को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने दलील दी की गुटखे में तंबाकू नहीं होने के बावजूद यह लत लगाने वाला और हानिकारक पदार्थ है। साथ ही पान मसाले और तंबाकू को अलग-अलग बेचकर कंपनियां कानूनों का मजाक बना रही हैं क्योंकि वे तंबाकू के साथ गुटखे का निर्माण नहीं कर सकतीं।
जयसिंह ने बताया कि इस समय देश की 35 फीसदी वयस्क आबादी तंबाकू की लत की शिकार है। तंबाकू उत्पादों से सरकार को भी नुकसान हो रहा है क्योंकि इनसे होने वाली बीमारियों पर सरकार का खर्च इनसे मिलने वाले राजस्व से कहीं ज्यादा है।
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि हर किस्म के पान मसाले और गुटखे से लत ही लगती है। आज इसे जीवनशैली से जोड़कर और जरूरी उत्पाद के रूप में पेश किया जा रहा है। माउथ फ्रेशनर के रूप में बेचा जा रहा है। इसकी जिम्मेदार उद्योग पर है और उन्हें इसका उत्पादन बंद करना होगा।
सरकार ने कोर्ट से आग्रह किया की गुटखा रोकना और बिक्री उत्पादन रोकना जरूरी है और हर तरह के गुटखे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए वह उचित आदेश पारित करे।
इससे पहले उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और दिल्ली में गुटखे पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।