इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर केस में अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने गुजरात के निलंबित एडीजीपी पांडे और आईपीएस वंजारा को जमानत दे दी है। 2004 में हुई इस फर्जी मुठभेड़ में इशरत जहां समेत चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था।
पांडे इस मामले में गिरफ्तार किए गए सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसर हैं। उन्होंने विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में एक साल से ज्यादा की सजा काटी। पांडे को अदालत ने पचास-पचास हजार के दो मुचलके और अपना पासपोर्ट जमा करने को कहा है।
पीपी पांडे उस समय अहमदाबाद के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर थे, जब पुलिस की डीसीबी (डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच) ने कॉलेज की एक लड़की इशरत जहां और उसके तीन साथियों को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला था।
पुलिस ने दावा किया था कि मारे गए लोग लश्कर-ए-तोइबा के आतंकी थे और नरेंद्र मोदी को मारने के इरादे से आए थे। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच में ये पाया कि यह एक फर्जी मुठभेड़ थी जो गुजरात पुलिस के अफसरों ने आईबी के कुछ अधिकारियों को साथ मिलकर रची थी।