2002 के गुजरात दंगों की जांच करने वाले नानावती जांच आयोग का कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सबूत पर्याप्त नहीं थे, इसलिए उन्हें समन भेजकर पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया।
मंगलवार को जस्टिस नानावती ने करीब 12 साल बाद अपनी जांच पूरी कर फाइनल रिपोर्ट राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सौंपी थी।
बुधवार को मोदी के संबंध में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए जस्टिस जीटी नानावती ने कहा, "उन्हें इसलिए समन नहीं भेजा गया क्योंकि हमारे पास उनके खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। इसलिए उन्हें आयोग के समक्ष बुलाना या सवालों के जवाब देने को कहना हमें सही नहीं लगा।"
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि इसका मतलब यह हुआ कि रिपोर्ट में मोदी को क्लीन चिट दी गई है, तो उन्होंने सावधानी बरतते हुए कहा, "ऐसा जरूरी नहीं है। सबूतों पर विचार किया जाना चाहिए। सबूतों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए और परिणाम को रिकॉर्ड किए जाने की जरूरत है।"
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने स्थानीय अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट दायर करते हुए मोदी को क्लीन चिट दी थी।