कैग की रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात की सरकारी कंपनियों ने निजी औद्योगिक घरानों को 'अनुचित लाभ' देकर सरकारी खजाने को 200 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया।
गुजरात सरकार की कंपनियों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एस्सार स्टील और अडानी पावर लिमिटेड को अनुचित लाभ' दिया।
राज्य सरकार ने फोर्ड इंडिया और लार्सन एंड टुब्रो जमीनें उपलब्ध कराने के लिए नियमों में भी फेरबदल कर डाले।
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात सरकार की कंपनी गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) और रिलायंस इडस्ट्रीज ने गैस सप्लाई के लिए करार किया था।
करार के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने केजी बेसिन डी-6 से आ रही गैस को भरूच से जामनगर की अपनी रिफाइनरी तक पहुंचाने के लिए जीएसपीएल की पाइप लाइन का इस्तेमाल किया।
हालांकि इसके लिए करार के मुताबिक भुगतान नहीं किया गया, जिससे सरकारी खजाने को 52 करोड़ 27 लाख रुपए को नुकसान हुआ।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि जीएसपसीएल ने सरकार के हितों को ताक पर रखकर रिलायंस को लाभ पहुंचाया।
इसी तरह सरकारी कंपनी गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएल) ने करार के मुताबिक काम न करने पर अडानी पावर लिमिटेड से 160 करोड़ रुपए का जुर्माना नहीं वसूला।
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात सरकार ने फोर्ड इंडिया लिमिटेड और लॉर्सन एंड टूब्रो के लिए नियमों को ताक पर रखकर जमीन का आवंटन किया।