गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को यूपी भाजपा के नेता रास नहीं आ रहे हैं। चुनाव के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में यूपी के नेताओं में से सिर्फ राजनाथ सिंह ही जगह पा सके हैं। बाकी सभी नामों को मोदी ने एक तरह से ‘लाल झंडी’ दिखा दी है। प्रदेश भाजपा के भीतर अंदरूनी राजनीति व खींचतान को इसकी वजह के रूप में देखा जा रहा है।
वैसे तो मोदी ने पिछले महीने फरीदाबाद में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में ही यह ऐलान कर दिया था कि प्रचार के लिए उन्हें किसी की मदद की जरूरत नहीं है। पर, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लगा कि इससे गलत संदेश जाएगा। इसलिए उन्होंने मोदी से बातचीत करके पार्टी के अन्य नेताओं को भी प्रचार में जुटाने के लिए राजी कराया। नाम तय करने की जिम्मेदारी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह व अरुण जेटली को सौंपी गई।
जानकारी के मुताबिक, जब नामों पर चर्चा शुरू हुई तो मोदी ने एक-एक करके सभी नामों को खारिज करना शुरू कर दिया। उमा भारती, मुख्तार, विनय कटियार सहित कई नेता लिस्ट से बाहर हो गए। सिर्फ राजनाथ सिंह की नाम बचा।
सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने यह फैसला तब किया जब सूरत, अहमदाबाद और बड़ौदा में उत्तर प्रदेश के लोगों की अच्छी आबादी है। माना जा रहा है कि इसके पीछे मोदी की अपनी राजनीति है। दरअसल, लोकसभा चुनाव को लेकर जिस तरह मोदी को महत्वपूर्ण भूमिका सौंपे जाने की चर्चाएं चल रही हैं उसके मद्देनजर मोदी यह साबित करना चाहते हैं कि उनमें अकेले दम पर पार्टी की नैया पार लगाने का दमखम है।
हालांकि उमा के नजदीकी लोगों का दावा है कि उमा भारती पहले ही 2 दिसंबर तक राजनीति में सक्रिय न रहने का फैसला कर चुकी हैं। इसके बावजूद उनका नाम सूची में शामिल करके मोदी के सामने रखा गया। मोदी का उमा की व्यस्तता पता थी, इसलिए उनका नाम लिस्ट से काटा गया।