कहते हैं कि किशोरावस्था में लड़के अक्सर बहक जाते हैं। लेकिन अगर वह शराब पीकर बहकें तो! वाकई में यह हमारे समाज के लिए खतरे की घंटी है।
हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में चेताया गया है कि भारत में किशोरावस्था में शराब पीने का चलन बढ़ गया है। बीते कुछ दशकों में ऐसे लोगों की संख्या में तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो कि काफी चिंताजनक है।
अध्ययन मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अरविंद पिल्लई और उनके सहयोगियों ने किया।
गरीब घरों के युवाओं में ज्यादा असर
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि शहरी इलाकों में रहने वालों और गरीब घरों के किशोरों में यह चलन कुछ ज्यादा ही है।
उन्होंने अध्ययन के तहत उत्तरी गोवा के शहरी और ग्रामीण इलाकों में 20 से 49 साल की उम्र के करीब दो हजार पुरुषों से सवाल पूछे। जैसे कि उन्होंने पहली बार शराब पीना कब शुरू किया, कितना पीते हैं और क्या कभी शराब के नशे में किसी को चोट पहुंचाया है या नहीं इत्यादि।
प्रश्नावली के जरिए ऐसे लोगों के मानसिक तनाव के स्तर का भी मूल्यांकन किया गया। उन्होंने पाया कि 1956 से 1960 के बीच जन्मे ऐसे लोगों का अनुपात 20 फीसदी है, जिन्होंने अपनी किशोरावस्था से ही शराब पीना शुरू कर दिया था।
तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी
अध्ययन में 1981 से 1985 के बीच जन्मे ऐसे लोग की संख्या 74 फीसदी हैं। यानी इसमें तीन गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
शराब पीने वाले किशोरों के ज्यादा मानसिक तनाव लेने और लंबे समय तक शराब पर निर्भर रहने की संभावना होती है। जबकि देर से शराब का सेवन शुरू करने वालों में यह प्रवृत्ति कम पाई जाती है।
अध्ययन जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिटी हेल्थ में प्रकाशित किया गया है।