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घाटी में बढ़ते ग्रेनेड हमले आतंकवाद की शुरुआत के संकेत

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सुरक्षा एजेंसियां घाटी में पिछले दो दिन में हुए चार ग्रेनेड हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों की 90 के दशक में लौटने की कोशिशों का संकेत मान रही हैं।
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एजेंसियों का मानना है कि ग्रेनेड हमला आतंकवादियों का सबसे कारगर हथियार साबित हुआ है। सूत्रों का कहना है कि पिछले छह महीने से पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई घाटी में माहौल को गरमाने में लगी है।

इसी के तहत पाकिस्तान और आतंकी संगठन आईएसआईएस के झंडे दिखाकर सुरक्षा एजेंसियों को उकसाने की कोशिश की जा रही है। ग्रेनेड हमले से बचने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर श्रीनगर समेत पूरी घाटी में बंकर का सहारा लेना होगा।
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1989 में घाटी में आम था ग्रेनेड हमला

कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ग्रेनेड हमले के प्रभाव में अगर फिर से बंकर बनाना पड़ा तो आम लोगों में कड़ा विरोध होगा।

आतंकवाद के चरम दौर में ग्रेनेड हमले से बचने के लिए बनाए गए करीब 60 बंकरों को केंद्र की पहल पर 2010 तक बड़ी मशक्कत से हटाया जा चुका है।

अधिकारी के मुताबिक 1989 में घाटी में आतंकवाद की शुरुआत के बाद घाटी में ग्रेनेड हमला आम हो गया था। उस दौरान गाड़ियों का शीशा खोलकर चलने पर पाबंदी लगा दी गई थी।

शुरू में आतंकवादी मोटरसाइकिल पर तेजी से आते और किसी भी गाड़ी में खिड़की से ग्रेनेड डाल कर तेजी से आगे बढ़ जाते। इस तरीके से आतंकियों ने सुरक्षाकर्मियों सहित सैकड़ों लोगों की जान ली है।
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