ग्रीनपीस इंडिया पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठाने वाले इस संगठन के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने और ऑफिस चलाने के लिए केवल एक महीने का धन बचा है। संगठन ने इसके लिए सरकार को दोषी ठहराया है।
ग्रीनपीस इंडिया के कार्यकारी निदेशक समित आइच ने कर्मचारियों को जल्द होने वाली बंदी के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि संगठन को पूरी तरह से बंद होने से बचाने के लिए केवल एक महीने का समय बचा है।
उनके अनुसार गृह मंत्रालय की ओर से संगठन के घरेलू बैंक खातों पर रोक लगाने के आदेश से 340 कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। इससे दीर्घकालीन विकास, पर्यावरणीय न्याय और साफ तथा सस्ती ऊर्जा के मुद्दे पर उठने वाली गरीबों की आवाज को भी झटका लगा है।
हालांकि संगठन मंत्रालय के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहा है पर मामला एक जून के बाद तक भी खिंच सकता है। ग्रीनपीस इंडिया के पास तब तक के लिए पैसे नहीं हैं।