यूरोप की मशहूर ऑटो निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन की भारतीय समूह कंपनी स्कोडा के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की गई है। याचिका में कंपनी पर आरोप है कि इनकी कारें तय उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करती हैं। याची ने कंपनी के कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। ग्रीन ट्रिब्यूनल 30 नवंबर को इस केस पर विचार करेगा।
दिल्ली के एक निजी स्कूल में पढ़ाने वाली सलोनी आइलावाडी ने अपनी याचिका में कहा है कि कंपनी द्वारा बेची जाने वाली कुछ कारें तय मानकों से नौ गुना ज्यादा नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करती हैं। सलोनी ने बताया कि हाल ही में उनके पिता एससी मंजुल की स्वास्थ्य जांच में कैंसर का पता चला है। यह कैंसर अंतिम अवस्था (चौथे चरण) में है।
यह स्थापित तथ्य है कि दिल्ली जैसे महानगर में वाहनों से होने वाले खतरनाक गैसों के उत्सर्जन से वायु प्रदूषित हो रही है। इसके चलते लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझकर जान गंवानी पड़ रही है। इसलिए कंपनी को कारों की बिक्री ही नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एसेंबलिंग की भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिका में मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक इंटरप्राइजेज, पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, स्कोडा ऑटो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फॉक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को पार्टी बनाया गया है।